यह क्या शिक्षा मंत्री जी तो कुछ जानते ही नहीं, शिक्षकों की उपस्थिति वाले फैसले से जतायी अनभिज्ञता
पटना।कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरों को देखते हुए आगामी 31 मार्च तक बिहार प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के बिहार सरकार का फैसला तथा बंद के दौरान शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के उपस्थिति के फरमान को लेकर विधानसभा में शिक्षा मंत्री कृष्णानंदन वर्मा ने अजीबोगरीब जवाब दिया। शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने के फैसले के बारे में शिक्षा मंत्री ने कहा कि ठीक है मगर वही शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति के फैसले के बारे में शिक्षा मंत्री ने अनभिज्ञता जाहिर किया।यह काफ़ी हैरत में डाल देने वाली बात है कि शिक्षा विभाग से जुड़े फैसले के बारे में राज्य के शिक्षा मंत्री ही नहीं जानते हैं।विधानसभा में एक प्रश्न का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को लिए गए बंदी के फैसले के दौरान स्कूल कॉलेज के बंद रहने के बावजूद शिक्षकों को किसने बुलाया,इसका वे पता लगायेंगे।गौरतलब है कि बिहार सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि आगामी 31 मार्च तक प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थान, चिड़ियाघर,सभी पार्क,सभी कार्यक्रम बंद रहेंगे।कई जिलों में धारा 144 लागू की गई है।मगर इन्हीं फैसलों के बीच एक और फैसला लिया गया कि शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने के बावजूद शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारी संस्थानों में उपस्थिति दर्ज कराएंगे।सरकार के इस फैसले की भाजपा विधान पार्षद नवल किशोर यादव समेत कई अन्य लोगों ने आलोचना भी की।इतना ही नहीं मीडिया में इससे जुड़ी खबरें भी प्रसारित की गईं।इसके बावजूद आज विधानसभा में शिक्षकों के स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री के कृष्ण नंदन वर्मा ने अनभिज्ञता जता दी।अगर शिक्षा मंत्री को इस फैसले का ज्ञात नहीं है।तो उन्हें बताना चाहिए कि उनके मंत्री पद पर बने रहने के बावजूद उनके विभागों का फैसला भला कौन करता है?


