टेंडर घोटाले में जांच तेज, निलंबित आईएएस अधिकारियों के ठिकानों पर विशेष निगरानी इकाई की छापेमारी
- पटना के कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू
- रिशु श्री की कथित भूमिका पर फोकस, टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों से संबंधों की पड़ताल तेज
पटना। बिहार में चर्चित टेंडर घोटाला मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। विशेष निगरानी इकाई ने शुक्रवार को निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा सहित कई संबंधित व्यक्तियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। राजधानी पटना के विभिन्न इलाकों में चल रही इस कार्रवाई को अब तक की सबसे महत्वपूर्ण जांच प्रक्रियाओं में से एक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां सरकारी टेंडरों, वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निर्माण और अधिकारियों के साथ कथित सांठगांठ से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित अनियमितताओं की वास्तविकता का पता लगाना और पूरे नेटवर्क को सामने लाना है।
एक साथ कई ठिकानों पर कार्रवाई
विशेष निगरानी इकाई की टीम सुबह से ही पटना के विभिन्न स्थानों पर सक्रिय रही। निलंबित आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर के गर्दनीबाग स्थित सरकारी आवास पर जांच दल ने दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की जांच की। इसी प्रकार आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा के नेहरू पथ स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया गया। इसके अतिरिक्त मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार के बेउर स्थित आवास पर भी जांच एजेंसियों की टीम पहुंची। यहां कंपनी से जुड़े अभिलेखों, टेंडर संबंधी कागजातों तथा वित्तीय दस्तावेजों की विशेष रूप से जांच की जा रही है।
सरकार पहले ही कर चुकी है कार्रवाई
टेंडर घोटाले में नाम सामने आने के बाद बिहार सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा को निलंबित कर दिया था। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की। योगेश कुमार सागर वर्ष 2017 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत अररिया जिले के फारबिसगंज अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में की थी। बाद में वे भागलपुर नगर निगम के आयुक्त रहे और उसके बाद बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद पर कार्यरत रहे। वर्तमान में वे समाज कल्याण विभाग से जुड़े रहे हैं। वहीं अभिलाषा कुमारी शर्मा वर्ष 2014 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं और ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत जीविका कार्यक्रम की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में कार्यरत रही हैं।
रिशु श्री की भूमिका जांच के केंद्र में
इस पूरे मामले में रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह पहले से ही भ्रष्टाचार और धन शोधन से जुड़े मामलों में आरोपित है। विशेष निगरानी इकाई तथा प्रवर्तन निदेशालय की जांच में उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच रिपोर्टों के अनुसार रिशु श्री पर आरोप है कि वह सरकारी अधिकारियों के साथ संपर्क स्थापित कर सरकारी टेंडरों की गोपनीय जानकारी पहले से प्राप्त कर लेता था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर अपनी पसंद के ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास करता था। बदले में उसे आर्थिक लाभ प्राप्त होता था।
टेंडर प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप के आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार रिशु श्री केवल टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रशासनिक नियुक्तियों और पदस्थापनाओं को प्रभावित करने का भी प्रयास करता था। जांच में ऐसे कई कथित लेनदेन सामने आए हैं जिनकी अब अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है। अधिकारियों के साथ उसके संबंधों और विभिन्न यात्राओं पर हुए खर्च को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित रूप से किए गए खर्चों और बाद में मिले सरकारी ठेकों के बीच कोई संबंध था या नहीं।
वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार रिशु श्री द्वारा अर्जित संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी व्यापक जांच की जा रही है। आरोप है कि उसने विभिन्न माध्यमों से बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित की। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस संपत्ति के स्रोत, उससे जुड़े बैंकिंग और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मामले की कई महत्वपूर्ण परतों को उजागर कर सकते हैं। इसी कारण छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और वित्तीय अभिलेखों की गहन जांच की जा रही है। विशेषज्ञों की टीम इन सूचनाओं का विश्लेषण कर रही है।
जांच से खुल सकते हैं कई और राज
विशेष निगरानी इकाई की ताजा कार्रवाई ने टेंडर घोटाला मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में इस जांच को लेकर व्यापक चर्चा है। माना जा रहा है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।


