होर्मुज में बढ़ा तनाव, ईरान की नई योजना से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल
- जहाजों से सेवा शुल्क वसूलने की तैयारी में ईरान, अमेरिका और पश्चिमी देशों ने जताई चिंता
- तेल कीमतों में उछाल, सैन्य गतिविधियां तेज, पश्चिम एशिया में बढ़ा युद्ध और आर्थिक संकट का खतरा
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान और ओमान इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क वसूलने की व्यवस्था को लेकर बातचीत कर रहे हैं। ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के “प्रबंधन निगरानी क्षेत्र” की सीमा तय कर दी है और अब वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा बाजार दोनों में हलचल बढ़ा दी है। दरअसल फरवरी में अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी थी। इससे अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी जलमार्ग से होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का प्रतिबंध या शुल्क वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान सीधे टोल टैक्स लगाने के बजाय “सेवा शुल्क मॉडल” पर विचार कर रहा है। इसके तहत जहाजों से पारगमन शुल्क, पर्यावरण शुल्क और अन्य सेवाओं के नाम पर धन लिया जा सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि ओमान भी इस योजना में संभावित आर्थिक लाभ देख रहा है और वह इस पर साझेदारी को लेकर चर्चा कर रहा है। माना जा रहा है कि ओमान खाड़ी देशों और अमेरिका के साथ इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि अमेरिका ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का टोल स्वीकार नहीं किया जाएगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी चेतावनी दी कि यदि ईरान जहाजों से शुल्क वसूलने की कोशिश करता है तो अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित समझौते की संभावना कमजोर हो जाएगी। इसी बीच पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के पास युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में खड़े लगभग 1600 तेल जहाज जल्द आगे बढ़ेंगे, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। दूसरी ओर ईरान ने दावा किया है कि उसके पास कई आधुनिक और अब तक प्रयोग नहीं किए गए हथियार मौजूद हैं। ईरानी सैन्य सूत्रों ने चेतावनी दी कि यदि दोबारा हमला हुआ तो जवाब बिना किसी संयम के दिया जाएगा। तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव और अमेरिकी तेल भंडार में गिरावट के कारण वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो दुनिया भर में महंगाई और ऊर्जा संकट गहरा सकता है। अमेरिका ने इस बीच ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए लेबनान में ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शैबानी समेत नौ लोगों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का आरोप है कि ये लोग लेबनान की राजनीतिक स्थिरता और शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे थे। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक मानकों के खिलाफ है। अरब सागर में भी अमेरिकी सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन से लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाएं “उच्च परिचालन तैयारी” की स्थिति में हैं और क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उधर ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के दौरान मलबे में दबे 7200 से अधिक लोगों को जिंदा बचाया गया। संस्था ने पहली बार राहत और बचाव अभियान के वीडियो भी जारी किए हैं। संगठन के अनुसार युद्ध 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक चला और इस दौरान लगातार बचाव अभियान चलाए गए।


