शेयर बाजार में चौथे दिन भी बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता
- सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, सूचना प्रौद्योगिकी और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक तनाव का बाजार पर असर
मुंबई। देश के शेयर बाजार में सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान BSE SENSEX करीब 1000 अंक टूटकर 75 हजार के स्तर पर पहुंच गया, जबकि NIFTY 50 में भी लगभग 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,500 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले चार कारोबारी दिनों में सेंसेक्स करीब 3 हजार अंक और निफ्टी लगभग 800 अंक टूट चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे ज्यादा दबाव सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर देखा गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयरों में चार प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, मीडिया और निजी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार पर भारी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। निवेशकों को डर है कि इससे आम लोगों की क्रय शक्ति और कंपनियों के मुनाफे दोनों प्रभावित हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों के बाद निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। सोमवार को विदेशी निवेशकों ने लगभग 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। लगातार हो रही यह बिकवाली बाजार की धारणा को कमजोर कर रही है और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और चीन का शंघाई सूचकांक भारी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं अमेरिकी बाजारों के भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले हैं। वैश्विक बाजारों में यह नकारात्मक माहौल भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर रहा है। इसी बीच भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर 95.5 तक पहुंच गया है। रुपये की कमजोरी विदेशी निवेशकों के लिए एक अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रही है, जिसके कारण वे भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं। बाजार में डर और अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक ‘इंडिया विक्स’ भी दो प्रतिशत बढ़कर 18.87 पर पहुंच गया है। इसका बढ़ना इस बात का संकेत माना जाता है कि आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजर अब अप्रैल महीने के खुदरा महंगाई आंकड़ों पर टिकी हुई है, जो शाम को जारी होने वाले हैं। बाजार को आशंका है कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर महंगाई दर पर दिखाई दे सकता है, जिससे ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। इससे पहले 11 मई को भी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 1,313 अंक टूटकर 76,015 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 360 अंक गिरकर 23,815 के स्तर पर बंद हुआ था। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने शेयर बाजार को दबाव में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर नहीं होते और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।


