तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल, एआईएडीएमके दो फाड़; विजय सरकार को मिला नया समर्थन
- सीवी षणमुगम ने 30 विधायकों के साथ टीवीके सरकार को समर्थन देने का किया ऐलान
- एआईएडीएमके में नेतृत्व संकट गहराया, पलानीसामी के खिलाफ बगावत तेज
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर सामने आया है। राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम में अब खुली टूट दिखाई देने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी षणमुगम ने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम को समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि उनके साथ लगभग 30 विधायक भी विजय सरकार के समर्थन में आ चुके हैं। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है और एआईएडीएमके के भविष्य को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मंगलवार सुबह मीडिया से बातचीत करते हुए सीवी षणमुगम ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि जनता ने इस चुनाव में टीवीके से अधिक विजय के नेतृत्व पर भरोसा जताया है, इसलिए उन्होंने विजय सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया है। षणमुगम ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य एआईएडीएमके को तोड़ना नहीं है। उन्होंने कहा कि एडप्पादी पलानीसामी अब भी उनके नेता हैं, लेकिन पार्टी के भीतर कई मुद्दों को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा था। उन्होंने कहा कि एआईएडीएमके की स्थापना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के विरोध के आधार पर हुई थी और पिछले 53 वर्षों से पार्टी की राजनीति डीएमके के खिलाफ केंद्रित रही है। ऐसे में डीएमके के साथ किसी भी प्रकार का गठबंधन पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता था। इसी कारण पार्टी के अधिकांश सदस्यों ने डीएमके समर्थित सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया। षणमुगम के अनुसार वर्तमान परिस्थिति में पार्टी को फिर से मजबूत और जीवंत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका गुट किसी औपचारिक गठबंधन में नहीं है, लेकिन राज्य में स्थिर सरकार के लिए उन्होंने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके को केवल 47 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा था। अब पार्टी में केवल पलानीसामी गुट ही सक्रिय रूप से बचा हुआ माना जा रहा है, जिसमें लगभग 17 प्रमुख नेता शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी के पूर्व नेता केसी पलानीसामी ने कहा कि एआईएडीएमके के भीतर स्पष्ट रूप से फूट पड़ चुकी है। कई विधायक नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं और यदि एडप्पादी पलानीसामी शीर्ष पद पर बने रहते हैं, तो और विधायक भी टीवीके को समर्थन दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को बचाने के लिए पलानीसामी को स्वयं पद छोड़ देना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएडीएमके लगातार चुनावी हार से कमजोर होती गई। वर्ष 2019 के आम चुनाव, 2021 के विधानसभा चुनाव, 2024 के लोकसभा चुनाव और इरोड उपचुनाव में हार ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर कर दिया। वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी के साथ संबंध खराब होने का भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। कुछ नेताओं ने पलानीसामी पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को ऐसी सीटें देने की कोशिश की, जहां जीत की संभावना बेहद कम थी। इस बीच तमिलगा वेत्री कड़गम के प्रमुख और अभिनेता से नेता बने सी जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल ने उन्हें 13 मई तक विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश दिया है। टीवीके नेता एमवी करुप्पैया को अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 1967 के बाद पहली बार राज्य में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनी है। लगभग 59 वर्षों तक राज्य की राजनीति इन्हीं दो दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन अब विजय की पार्टी ने उस राजनीतिक परंपरा को तोड़ दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एआईएडीएमके में जारी यह संकट आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। यदि पार्टी के भीतर असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण उभर सकता है। वहीं विजय सरकार को मिला यह नया समर्थन उनकी स्थिति को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।


