मंत्रिमंडल विस्तार के बाद निशांत कुमार ने संभाली स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी

  • स्वास्थ्य मंत्री बोले- सीखकर बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने का करूंगा प्रया

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभागों के बंटवारे के अगले ही दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक महत्वपूर्ण बातचीत हुई। मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात की तस्वीर भी साझा की, जिसमें नीतीश कुमार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखे दिखाई दे रहे हैं। इस मुलाकात को नई सरकार की कार्यशैली और भविष्य की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय और सरकार की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बिहार में नई सरकार बनने के 22 दिन बाद गुरुवार को सम्राट मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था, जिसके बाद शुक्रवार से नए मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों का कार्यभार संभालना शुरू कर दिया। सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है। पहली बार राजनीति और सरकार में सक्रिय भूमिका निभाने वाले निशांत कुमार को स्वास्थ्य विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के रूप में विभाग का कार्यभार ग्रहण किया। पद संभालने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे वे पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। स्वास्थ्य विभाग का कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में निशांत कुमार ने कहा कि वे पहले विभाग के कामकाज को समझेंगे, सीखेंगे और फिर बेहतर निर्णय लेने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं पहले यहां का काम देखूंगा और सीखूंगा, उसके बाद जो बेहतर होगा वह करूंगा। मेरे पिताजी ने बिहार को आगे बढ़ाने के लिए काम किया है। मैं उन कार्यों को और आगे ले जाने का प्रयास करूंगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता होगी। उनके बयान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। चूंकि निशांत कुमार पहली बार मंत्री बने हैं और फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनके कामकाज और राजनीतिक भविष्य को लेकर लोगों की नजरें बनी हुई हैं। गौरतलब है कि गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य समारोह के दौरान कुल 32 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। इस समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा रक्षा मंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समारोह को बिहार की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन और नई राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में देखा गया। नई मंत्रिपरिषद में भारतीय जनता पार्टी के 15, जनता दल यूनाइटेड के 13, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 2, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के 1 तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 1 मंत्री शामिल किए गए हैं। सरकार ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी कोशिश की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग समेत कुल छह विभाग अपने पास रखे हैं। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि विजय कुमार चौधरी जल संसाधन विभाग संभालेंगे। वहीं शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिथिलेश तिवारी को दी गई है। बिहार की राजनीति में यह पहली बार हुआ है जब शिक्षा विभाग भारतीय जनता पार्टी के खाते में गया है। नई सरकार में कई नए चेहरों को मौका दिया गया है। इनमें निशांत कुमार के अलावा कई ऐसे नेता शामिल हैं जो पहली बार मंत्री बने हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने और नए सामाजिक समीकरण बनाने की दिशा में यह कदम उठाया है। नई मंत्रिपरिषद के गठन के बाद अब लोगों की नजर सरकार के कामकाज पर टिक गई है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर नई सरकार किस तरह काम करती है, यह आने वाले समय में तय करेगा कि जनता के बीच सरकार की छवि कैसी बनती है। वहीं निशांत कुमार जैसे नए चेहरों की कार्यशैली भी बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बनी हुई है।

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