भारत में नहीं होगी अब एलपीजी की किल्लत, होर्मुज से एलएनजी टैंकर भेजने को कतर तैयार
- युद्ध के बीच गैस संकट पर चर्चा, भारत-कतर वार्ता में समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आपूर्ति बहाली पर जोर
- ईरान युद्धविराम को बताया अहम अवसर, फंसे जहाजों की निकासी पर भी बातचीत
नई दिल्ली/दोहा। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 9 और 10 अप्रैल को कतर का दो दिवसीय दौरा कर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कतर के ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर ऊर्जा कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी साद शेरिडा अल-काबी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण भारत में रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति के भविष्य पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने उम्मीद जताई कि यह युद्धविराम क्षेत्र में स्थिरता लाने के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही को सुचारु बनाएगा। गौरतलब है कि ईरान से जुड़े संघर्ष की शुरुआत के बाद भारत को कतर से तरलीकृत प्राकृतिक गैस की एक भी खेप प्राप्त नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने और कतर के रास लफान संयंत्र पर हमलों के कारण कतर को आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में ‘अपरिहार्य परिस्थिति’ घोषित करनी पड़ी थी। इस स्थिति ने भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। पुरी और अल-काबी ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री मार्गों से ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध संचालन बेहद आवश्यक है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। वर्तमान में यह क्षेत्र आंशिक रूप से ईरान के प्रभाव में है, जिससे आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, इस समय लगभग 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। भारत सरकार इन जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए तेहरान के साथ बातचीत कर रही है। हाल ही में कुछ भारतीय तरलीकृत पेट्रोलियम गैस टैंकर इस मार्ग को पार करने में सफल रहे हैं, जिससे देश में गैस संकट में आंशिक राहत मिली है। इस बीच यह भी खबर सामने आई है कि ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। हालांकि भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर अभी तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। कतर, भारत का सबसे बड़ा तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्तिकर्ता है और दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। साद अल-काबी ने भरोसा दिलाया कि कतर भारत के लिए एक विश्वसनीय ऊर्जा भागीदार बना रहेगा और युद्ध के कारण क्षतिग्रस्त हुए संयंत्रों की मरम्मत कर आपूर्ति जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत ने भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज कर दी है। अमेरिका, ओमान और अफ्रीकी देशों से गैस आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि घरेलू आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कतर के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना भारत के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे घरेलू गैस कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलती है। 8 अप्रैल से शुरू हुआ 14 दिनों का युद्धविराम भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इस अवधि का उपयोग भारत अपने फंसे हुए जहाजों और कार्गो को सुरक्षित निकालने और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कर रहा है। यह दौरा भारत की ऊर्जा कूटनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है और अपने साझेदार देशों के साथ सहयोग को मजबूत कर रहा है।


