पटना में दिन सस्ती और रात महंगी बिजली के बावजूद नहीं बदला खपत का रुझान

  • समय आधारित शुल्क प्रणाली लागू, फिर भी शाम के समय बढ़ रहा भार
  • विशेषज्ञों की सलाह—दिन में करें ज्यादा उपयोग, पीक समय में बचत से घटेगा बिल और दबाव

पटना। बिहार में 1 अप्रैल से लागू नई बिजली व्यवस्था के तहत दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन पटना के उपभोक्ताओं के व्यवहार में अब तक कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है। समय आधारित शुल्क प्रणाली लागू होने के बावजूद शाम होते ही बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है, जिससे बिजली तंत्र पर दबाव बना हुआ है। बिजली आपूर्ति कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल को पेसू क्षेत्र में शाम 4 बजे तक लगभग 445 मेगावाट बिजली की खपत दर्ज की गई थी, जो रात 8 बजे तक बढ़कर 504 मेगावाट हो गई। इसके बाद भी खपत में कमी नहीं आई और लगातार रात के समय अधिक उपयोग का सिलसिला जारी रहा। यह स्थिति लगभग रोज देखी जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता अभी तक नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं कर पाए हैं। नई व्यवस्था के तहत शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक का समय सबसे महंगा निर्धारित किया गया है, जिसे अधिकतम भार अवधि कहा जा रहा है। वहीं सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक का समय सबसे सस्ता रखा गया है, ताकि उपभोक्ता इस दौरान अधिक बिजली उपयोग कर अपने बिल में कमी ला सकें। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य बिजली की मांग को संतुलित करना और अधिकतम भार अवधि में दबाव को कम करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि उपभोक्ता अपनी आदतों में थोड़ा बदलाव करें, तो वे आसानी से अपने बिजली बिल में कमी ला सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि भारी बिजली खपत वाले उपकरणों का उपयोग दिन के समय किया जाए। उदाहरण के तौर पर वाशिंग मशीन, पानी का मोटर और कपड़े प्रेस करने जैसे कार्य सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच निपटाए जा सकते हैं। शाम के समय, जब बिजली महंगी होती है, उस दौरान अनावश्यक उपकरणों का उपयोग कम करने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से वातानुकूलन यंत्र का तापमान 26 डिग्री पर रखने और गैर-जरूरी लाइटों को बंद रखने से बिजली की खपत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इस समय बिजली दर लगभग 20 प्रतिशत अधिक होती है, जिससे बिल में भी वृद्धि होती है। बिजली विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वीकृत भार से अधिक बिजली उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यदि निर्धारित सीमा से अधिक लोड पाया जाता है, तो स्थायी शुल्क भी दोगुना किया जा सकता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने बिजली उपयोग को निर्धारित सीमा के भीतर ही रखें। हालांकि नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना और बिजली तंत्र को संतुलित बनाए रखना है, लेकिन व्यवहार में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लोगों की भागीदारी आवश्यक है। जब तक उपभोक्ता अपनी दिनचर्या में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक इस प्रणाली का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि समय आधारित शुल्क प्रणाली लंबे समय में लाभकारी साबित हो सकती है, बशर्ते लोग इसके अनुरूप अपनी आदतों को ढालें। इससे न केवल उपभोक्ताओं का खर्च कम होगा, बल्कि बिजली आपूर्ति प्रणाली पर भी दबाव घटेगा और बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा। फिलहाल स्थिति यह है कि पटना में रात के समय बिजली की खपत लगातार अधिक बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि नई व्यवस्था को लेकर जागरूकता और व्यवहारिक बदलाव की आवश्यकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उपभोक्ता इस प्रणाली को किस हद तक अपनाते हैं और इससे उन्हें कितना लाभ मिलता है।

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