बिहार में गैस संकट के बीच शादी समारोहों को राहत, सरकार ने जारी किए नए दिशा-निर्देश

  • मांगलिक कार्यों के लिए प्राथमिकता पर मिलेगा कमर्शियल गैस सिलेंडर, जिलों को दिए गए स्पष्ट आदेश
  • अंतरराष्ट्रीय हालात से प्रभावित आपूर्ति, बढ़ी लागत के बीच परिवारों और कैटरिंग व्यवसाय को सहारा

पटना। बिहार में रसोई गैस की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। खासकर उन परिवारों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण साबित होगा, जिनके यहां निकट भविष्य में शादी-ब्याह जैसे बड़े आयोजन होने वाले हैं। राज्य सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत अब विवाह समारोहों में भोजन तैयार करने के लिए गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि जिन परिवारों में शादी तय है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए। इस संबंध में विभाग की मंत्री लेशी सिंह और सचिव अभय कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह व्यवस्था जिले में उपलब्ध भंडार के अनुसार लागू की जाएगी, ताकि वितरण प्रणाली में किसी प्रकार की अव्यवस्था न उत्पन्न हो। मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शादी जैसे मांगलिक कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घरेलू गैस उपभोक्ताओं को भी राहत देने के लिए प्रयास जारी हैं। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार गैस बुकिंग के चार से पांच दिनों के भीतर घरों तक सिलेंडर पहुंचाने का दावा किया गया है, जिससे आम लोगों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़े। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर गैस आपूर्ति पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच टकराव के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका प्रभाव भारत सहित कई देशों में देखने को मिला है, जहां कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता में कमी आई है और कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने भी कई सख्त कदम उठाए हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति को नियंत्रित किया गया है और घरेलू गैस सिलेंडर के कमर्शियल उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा होटल, भोजनालय और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठानों के लिए कमर्शियल गैस कनेक्शन का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीकरण के अब किसी भी व्यवसाय को गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इन सख्त नियमों और गैस की कमी का सीधा असर कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ा है। शादी समारोहों में भोजन तैयार करने वाले कैटरर्स को अब अधिक लागत वहन करनी पड़ रही है। गैस की बढ़ती कीमत और सीमित उपलब्धता के कारण उन्होंने प्रति प्लेट खर्च में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी है। इसका सीधा असर शादी करने वाले परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। बढ़ती लागत के चलते कई परिवारों ने अपने विवाह समारोह के मेन्यू में कटौती शुरू कर दी है। पहले जहां विभिन्न प्रकार के व्यंजन और सजीव भोजन स्टॉल शामिल किए जाते थे, अब उन्हें सीमित किया जा रहा है, ताकि गैस की खपत कम हो और खर्च पर नियंत्रण रखा जा सके। इसी बीच, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चल रहा खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होने जा रहा है, जिसके बाद 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू होंगे। अप्रैल और मई के महीनों में बड़ी संख्या में शादियां होने की संभावना है, जिससे बैंड, टेंट और कैटरिंग से जुड़े व्यवसायों को अच्छे कारोबार की उम्मीद है। सरकार की इस नई पहल से यह उम्मीद जताई जा रही है कि गैस संकट के बावजूद शादी-ब्याह के आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सकेंगे। साथ ही, आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा और सामाजिक आयोजनों की परंपरा भी बिना बाधा के जारी रह सकेगी।

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