देश के लोगों को बड़ी राहत: सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाया, नहीं बढ़ेंगे तेल के दाम
नई दिल्ली। बढ़ती वैश्विक अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती कर दी है। इस निर्णय का उद्देश्य देश में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना और आम जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है, जिससे तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ गया था।
पेट्रोल और डीजल पर नई दरें
सरकारी सूत्रों के अनुसार पेट्रोल पर लगने वाला उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, अर्थात अब डीजल पर यह कर शून्य हो गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से तेल कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव में कमी आएगी और वे तुरंत कीमतों में वृद्धि करने से बच सकेंगी।
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला
पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव, विशेष रूप से इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष की स्थिति ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति को प्रभावित किया है। आपूर्ति शृंखला में संभावित बाधा के कारण तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। कच्चा तेल महंगा होने से तेल कंपनियों को अधिक लागत पर ईंधन खरीदना पड़ रहा था, लेकिन उन्होंने घरेलू बाजार में कीमतें तुरंत नहीं बढ़ाईं। इस कारण कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये और डीजल पर करीब 30 रुपये का नुकसान होने की बात सामने आई है।
तेल कंपनियों की भूमिका
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें सीधे सरकार द्वारा तय नहीं की जाती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत, परिवहन लागत, कर तथा अपने लाभ को ध्यान में रखते हुए कीमत निर्धारित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पाद शुल्क में की गई कटौती से तेल कंपनियों को अपने पिछले घाटे की भरपाई करने में मदद मिलेगी और वे कीमतों में अचानक वृद्धि से बच सकेंगी।
निजी कंपनियों पर भी दबाव
सरकारी निर्णय से पहले निजी क्षेत्र की एक तेल कंपनी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल की कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी थी। इससे यह स्पष्ट हो गया था कि मौजूदा दरों पर ईंधन बेचना निजी कंपनियों के लिए कठिन हो रहा था। बढ़ती लागत और घटते लाभ के कारण निजी कंपनियों पर कीमत बढ़ाने का दबाव लगातार बढ़ रहा था।
उत्पाद शुल्क क्या होता है
उत्पाद शुल्क एक अप्रत्यक्ष कर है जो देश के भीतर निर्मित वस्तुओं पर लगाया जाता है। पेट्रोल और डीजल के मामले में जब कच्चा तेल रिफाइनरी में शुद्ध होकर तैयार उत्पाद के रूप में बाहर आता है, तब केंद्र सरकार प्रति लीटर के आधार पर निश्चित कर वसूलती है। चूंकि यह कर निश्चित दर पर होता है, इसलिए सरकार जरूरत के अनुसार इसमें कमी या बढ़ोतरी कर सकती है। कर में कमी करने से सरकार का राजस्व घटता है, लेकिन आम जनता को राहत मिलती है।
भविष्य की स्थिति पर नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है या आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती है, तो कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। ऐसी स्थिति में उत्पाद शुल्क में की गई कटौती एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगी ताकि देश में ईंधन की कीमतें अचानक बहुत अधिक न बढ़ें।
सरकार की समीक्षा बैठक
प्रधानमंत्री 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में वैश्विक परिस्थितियों, ऊर्जा आपूर्ति तथा आर्थिक प्रभावों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है और भारत के पास लगभग 60 दिनों की ऊर्जा आपूर्ति का भंडार उपलब्ध है।
जनता को राहत, राजस्व पर असर
उत्पाद शुल्क में कटौती से जहां आम जनता को राहत मिलेगी, वहीं सरकार के कर संग्रह पर कुछ प्रभाव पड़ेगा। फिर भी सरकार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आर्थिक स्थिरता बनाए रखना अधिक आवश्यक है। इस निर्णय से यह संकेत मिलता है कि सरकार वैश्विक संकट की स्थिति में जनता और अर्थव्यवस्था दोनों को संतुलित रखने का प्रयास कर रही है।


