September 25, 2026

एलपीजी संकट को लेकर अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला, विदेश नीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की संभावित कमी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एलपीजी गैस की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की विदेश नीति की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा संकट के लिए केंद्र की नीतियां जिम्मेदार हैं। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है और कई राज्यों में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गैस आपूर्ति में कमी आने के कारण देश के लाखों लोगों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। उनके अनुसार यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो बड़े पैमाने पर रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। केजरीवाल ने कहा कि भारत में उपयोग होने वाली गैस का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है। उनका दावा था कि देश में उपयोग होने वाली गैस का लगभग साठ प्रतिशत हिस्सा आयातित है और इसमें से अधिकांश आपूर्ति हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से होती थी। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के कारण इस मार्ग से आपूर्ति प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, जिसके चलते गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति में बदलाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। केजरीवाल ने कहा कि भारत लंबे समय तक गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करता रहा, जिसके कारण विभिन्न देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे गए थे। उनके अनुसार हाल के वर्षों में इस नीति में बदलाव हुआ है, जिससे कुछ देशों के साथ संबंधों में तनाव बढ़ा है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि गैस आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर होटल और खानपान से जुड़े प्रतिष्ठान बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं। उनके अनुसार इससे बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। केजरीवाल ने गुजरात के मोरबी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां टाइल्स उद्योग से जुड़े कई लोगों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी के नेता ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट जानकारी दे और गैस आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित विदेश नीति अपनानी चाहिए। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस विषय पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, इसलिए सरकारें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल एलपीजी आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गैस आपूर्ति की स्थिति किस प्रकार सामान्य होती है और सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है।

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