मैथिली ठाकुर पर तेजस्वी का पलटवार, कहा- कुछ लोग विधायक बनते ही बन जाते हैं राजनीति के पूर्ण जानकारी
पटना। बिहार की राजनीति इन दिनों तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। विधानसभा के सदन से लेकर सामाजिक माध्यमों तक राजनीतिक नेताओं के बीच शब्दों का टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस सियासी विवाद के केंद्र में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और गायिका से राजनेता बनीं विधायक मैथिली ठाकुर के बीच का ताजा विवाद है, जिसने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान मैथिली ठाकुर ने परोक्ष रूप से वर्ष 2005 से पहले के बिहार की स्थिति का उल्लेख करते हुए एक ‘पिता-पुत्र’ के रिश्ते की तुलना महाभारत काल के धृतराष्ट्र और दुर्योधन से की। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की ओर इशारा माना गया। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई और विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। मैथिली ठाकुर के इस बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सामाजिक माध्यम के जरिए बिना नाम लिए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि कुछ लोग विधायक बनने के बाद स्वयं को राजनीति का पूर्ण जानकार समझने लगते हैं और विधायिका की मूलभूत समझ के बिना ही जननायक पर टिप्पणी करने लगते हैं। तेजस्वी यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को जननायक बताते हुए स्पष्ट किया कि उनके सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस विवाद ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में ‘पुराना बिहार बनाम नया बिहार’ की बहस को हवा दे दी है। विपक्षी दल लंबे समय से वर्ष 2005 से पहले के शासनकाल को लेकर राष्ट्रीय जनता दल की आलोचना करते रहे हैं। मैथिली ठाकुर के बयान को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं और समर्थकों ने इसे अपने नेता के सम्मान के खिलाफ बताया है और इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और प्रतिक्रियाएं बिहार की राजनीति में ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकती हैं। राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से प्रस्तुत कर जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। विरोधी दल जहां इस बयान को वास्तविकता का प्रतिबिंब बता रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय जनता दल इसे अपने नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मान रहा है। इस जुबानी जंग ने आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संभावित चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के विवाद भविष्य में राजनीतिक रणनीतियों और चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल यह विवाद बयानबाजी तक सीमित है, लेकिन इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभावों से इनकार नहीं किया जा सकता। बिहार की राजनीति में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह सियासी टकराव आगे किस दिशा में जाता है और इसका राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर क्या प्रभाव पड़ता है।


