पटना में मौसम बदला तो सरकारी अस्पतालों में मरीज बढ़े, वायरल बुखार के मामले, आठ हज़ार के पार हुआ आंकड़ा
पटना। राजधानी पटना में मौसम के अचानक बदलते मिजाज का असर लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। सुबह और रात में हल्की ठंड और दोपहर में बढ़ती गर्माहट के कारण मौसमी बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका सीधा असर शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में देखने को मिल रहा है, जहां मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बुधवार को आईजीआईएमएस, पीएमसीएच और एम्स पटना जैसे बड़े अस्पतालों की बाह्य रोगी विभाग में कुल मिलाकर आठ हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
अस्पतालों में उमड़ी मरीजों की भीड़
अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को आईजीआईएमएस की बाह्य रोगी विभाग में 4339 मरीजों ने इलाज कराया। वहीं पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 1930 मरीज पहुंचे, जबकि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में 2870 मरीजों ने चिकित्सकीय परामर्श लिया। इन तीनों प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ देखी गई। सुबह बाह्य रोगी विभाग खुलते ही पंजीकरण काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं। मरीजों और उनके परिजनों को पर्ची बनवाने और डॉक्टर से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों को इलाज के लिए एक से दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसमी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी
आईजीआईएमएस के चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, शरीर में दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस समय वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम के इस संक्रमण काल में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे लोग आसानी से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। विशेष रूप से बच्चे और बुजुर्ग इस समय अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अधिक परेशानी
अस्पतालों में इलाज कराने आए कई मरीजों और उनके परिजनों ने पंजीकरण और जांच प्रक्रिया को लेकर अपनी परेशानी साझा की। जहानाबाद के ग्रामीण क्षेत्र से आए एक बुजुर्ग मरीज ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन की प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी, जिसके कारण उन्हें काफी देर तक इधर-उधर भटकना पड़ा। उन्होंने बताया कि पर्ची बनवाने के बाद भी उन्हें डॉक्टर से मिलने के लिए डेढ़ से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि अधिक उम्र होने के कारण लंबे समय तक लाइन में खड़ा रहना उनके लिए मुश्किल था और अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी। इसी तरह मोतिहारी से आई एक महिला मरीज ने बताया कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि किस विभाग में जाना है और किस तरह पंजीकरण करना है। उन्हें कई बार अलग-अलग काउंटरों पर भेजा गया और जांच के लिए एक भवन से दूसरे भवन तक जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए मार्गदर्शन की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली बनी परेशानी का कारण
अस्पताल पहुंचे कई मरीजों ने ऑनलाइन पंजीकरण और टोकन प्रणाली को लेकर भी असंतोष जताया। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आए बुजुर्ग और महिलाएं मोबाइल और ऑनलाइन प्रक्रियाओं को समझने में असमर्थ रहीं, जिसके कारण उन्हें अधिक परेशानी हुई। कई मरीजों ने बताया कि उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि किस जांच के लिए किस काउंटर पर जाना है। इससे उनका समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद हुए। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से इस दिशा में सुधार करने और बेहतर मार्गदर्शन की व्यवस्था करने की मांग की है।
अस्पताल प्रशासन ने दिए सुधार के संकेत
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि मरीजों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले दिनों में विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य इलाज और जांच की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना और मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना होगा। चिकित्सकों ने लोगों को बदलते मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि लोग ठंड और गर्मी के इस मिश्रित मौसम में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, पर्याप्त पानी पिएं और सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। मौसम में हो रहे बदलाव का असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है, ऐसे में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है, ताकि सभी मरीजों को समय पर और उचित इलाज मिल सके।


