आज लगेगा साल का पहला सूर्यग्रहण, 4 घंटे 20 मिनट की होगी अवधि, भारत में नहीं देगा दिखाई
नई दिल्ली। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है। यह एक खास खगोलीय घटना है, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जाएगा। हालांकि भारत के लिए यह ग्रहण केवल जानकारी तक ही सीमित रहेगा, क्योंकि यह देश में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। बावजूद इसके सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है, क्योंकि यह ग्रहण अपने आप में कई विशेषताएं समेटे हुए है।
आज का सूर्य ग्रहण कितना खास
आज लगने वाला सूर्य ग्रहण सामान्य नहीं बल्कि वलयाकार सूर्य ग्रहण है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा, बल्कि सूर्य का बाहरी किनारा चमकता हुआ दिखाई देगा। यही कारण है कि इस दृश्य को ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी आग की अंगूठी कहा जाता है। यह नजारा करीब दो मिनट बीस सेकंड तक देखने को मिलेगा, जब चंद्रमा सूर्य के लगभग 96 प्रतिशत हिस्से को ढक लेगा और सूर्य का केवल बाहरी घेरा ही प्रकाशित रहेगा।
भारतीय समय के अनुसार ग्रहण का समय
भारतीय समय के मुताबिक यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा। ग्रहण का मध्य समय शाम 5 बजकर 40 मिनट पर रहेगा और यह शाम 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा। इस तरह पूरे ग्रहण की अवधि करीब 4 घंटे 32 मिनट की होगी। इतनी लंबी अवधि का ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। खगोलीय नियमों के अनुसार सूर्य ग्रहण तभी दिखाई देता है, जब चंद्रमा की छाया पृथ्वी के उस हिस्से पर पड़ती है। इस बार चंद्रमा की छाया भारत तक नहीं पहुंचेगी। यही कारण है कि देश में इस ग्रहण का दृश्य प्रभाव नहीं होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी ग्रहण का प्रभाव उसी स्थान पर माना जाता है, जहां वह दिखाई देता है। इसलिए भारत में इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के पट बंद नहीं किए जाएंगे, भोजन और दिनचर्या सामान्य रहेगी और किसी विशेष नियम का पालन करना आवश्यक नहीं होगा। गर्भवती महिलाओं को भी किसी तरह की अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत नहीं है।
किन देशों में दिखेगा सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। खास तौर पर दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों जैसे अर्जेंटीना और चिली में लोग इस अद्भुत खगोलीय नजारे को देख सकेंगे। इन देशों में रहने वाले भारतीय स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन कर सकते हैं।
ग्रहण कैसे लगता है
वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण तब लगता है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है और जिस क्षेत्र में यह छाया गिरती है, वहां सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य से थोड़ा छोटा दिखाई देता है, इसलिए सूर्य का बाहरी किनारा चमकता रहता है।
ज्योतिषीय नजरिए से ग्रहण
ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय मिथुन लग्न रहेगा। उस दौरान अष्टम भाव में मंगल और नवम भाव में सूर्य, चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बन रहा है। कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि मिथुन लग्न का संबंध संचार और मीडिया से होता है। इसलिए इस दौरान मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, सैटेलाइट सिस्टम या ड्रोन तकनीक से जुड़ी अस्थायी परेशानियां सामने आ सकती हैं। हालांकि यह केवल ज्योतिषीय अनुमान हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता।
शासन और वैश्विक स्तर पर संभावित प्रभाव
ज्योतिषीय दृष्टि से यदि भारत की कुंडली में दशम भाव प्रभावित होता है, तो शासन, प्रशासन और नीतियों से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं। वैश्विक स्तर पर भी न्यायिक या नीतिगत फैसलों को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन बातों को केवल संभावनाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
ग्रहण और धार्मिक आस्था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करने, मंत्र जप करने और ध्यान करने की परंपरा रही है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में सूक्ष्म बदलाव होते हैं, जिससे भोजन की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। हालांकि विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता और इसे पूरी तरह आस्था से जुड़ा विषय मानता है।
जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां कई लोग ग्रहण के बाद स्नान और दान को शुभ मानते हैं। यह पूरी तरह व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर करता है।
कुल मिलाकर क्या असर
चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां किसी तरह की चिंता या विशेष सावधानी की जरूरत नहीं है। यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से जरूर महत्वपूर्ण है और दुनिया के कई हिस्सों में लोगों के लिए एक अद्भुत नजारा लेकर आ रहा है। भारत में यह दिन सामान्य रहेगा, लेकिन अंतरिक्ष और ज्योतिष में रुचि रखने वालों के लिए यह सूर्य ग्रहण चर्चा का विषय जरूर बना रहेगा।


