February 13, 2026

बिहार के डेंटल छात्रों को लगा बड़ा झटका, कॉलेज में नहीं लागू होगी डोमिसाइल नीति

  • सदन में स्वास्थ्य मंत्री ने दिया जवाब, कहा- मामला हाईकोर्ट में तो तत्काल लागू नहीं होगा नियम

पटना। बिहार के डेंटल छात्रों को डोमिसाइल नीति के मुद्दे पर बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल बिहार के डेंटल कॉलेजों में डोमिसाइल नीति लागू नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सदन में यह स्पष्ट किया कि मामला पटना उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी नई व्यवस्था को लागू करना संभव नहीं होगा।
सदन में सरकार का स्पष्ट रुख
शुक्रवार को विधानसभा में उठे सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब मामला अदालत में लंबित है, तब किसी भी प्रकार का प्रशासनिक या नीतिगत निर्णय लेना उचित नहीं होगा। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि अदालत का जो भी फैसला आएगा, सरकार उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगी। सरकार के इस बयान के बाद यह साफ हो गया है कि डेंटल कॉलेजों और दंत चिकित्सक भर्ती में डोमिसाइल नीति को लेकर फिलहाल यथास्थिति बनी रहेगी। इससे उन छात्रों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो लंबे समय से इस नीति के लागू होने की मांग कर रहे थे।
छात्रों की मांग और नाराजगी
राज्य के डेंटल छात्रों और अभ्यर्थियों का कहना है कि दंत चिकित्सक भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नीति में बदलाव के बाद बिहार के स्थानीय छात्रों को नुकसान हो रहा है। उनका आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण बाहर के अभ्यर्थियों को अधिक अवसर मिल रहे हैं, जबकि राज्य के छात्र अपने ही प्रदेश में पीछे छूट रहे हैं। छात्र संगठनों की मांग रही है कि डेंटल कॉलेजों में दाखिले और दंत चिकित्सक भर्ती में शत-प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू की जाए। उनका तर्क है कि राज्य के मेडिकल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में यदि स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता मिल सकती है, तो दंत चिकित्सा संस्थानों में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर छात्रों ने विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे हैं और सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। कई छात्र संगठनों ने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय बताया है।
कानूनी पेच में फंसा मामला
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह पूरा मामला अदालत में विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी नई नीति को लागू करना कानूनी रूप से जटिल हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद ही सरकार इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि डोमिसाइल नीति जैसे मामलों में संवैधानिक प्रावधानों और समान अवसर के सिद्धांतों को ध्यान में रखना पड़ता है। इसलिए अदालत का फैसला इस मामले में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
राजनीतिक सरगर्मी भी तेज
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने सदन में सरकार से पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना था कि राज्य के छात्रों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए। हालांकि सरकार ने दोहराया कि वह अदालत की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। मंत्री ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का निर्णय लेना न तो उचित है और न ही कानूनी रूप से संभव।
छात्रों के भविष्य पर असर
डेंटल की पढ़ाई करने वाले छात्रों का कहना है कि वे वर्षों की मेहनत और पढ़ाई के बाद रोजगार की उम्मीद रखते हैं। लेकिन नीतिगत अनिश्चितता के कारण उनके सामने भविष्य को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। उनका तर्क है कि यदि स्थानीय छात्रों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो वे अन्य राज्यों की ओर रुख करने को मजबूर होंगे। छात्र संगठनों ने कहा है कि वे अपने अधिकारों के लिए संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि यह केवल आरक्षण या नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के युवाओं के रोजगार से जुड़ा सवाल है।
अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल डोमिसाइल नीति को लेकर स्थिति जस की तस बनी हुई है। सरकार ने संकेत दिया है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद यदि जरूरत हुई तो नीति में संशोधन पर विचार किया जाएगा। लेकिन तब तक किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है। अब छात्रों, अभ्यर्थियों और सरकार—तीनों की नजरें पटना उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं। अदालत का निर्णय ही यह तय करेगा कि बिहार के डेंटल कॉलेजों और दंत चिकित्सक भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू होगी या नहीं। इस बीच, डेंटल छात्रों के बीच निराशा का माहौल है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही न्यायालय का फैसला आए और उनके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो। तब तक यह मुद्दा शैक्षणिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना रहेगा।

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