बिहार में महिला शिक्षकों का गृह जिले में होगी पोस्टिंग, विपक्ष की मांग पर शिक्षा मंत्री ने सदन में दिया जवाब
पटना। बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को महिला शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। सदन में महिला शिक्षकों के गृह जिले में तबादले, शिशु देखभाल अवकाश और मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान जैसे विषयों पर विपक्ष और सरकार के बीच गंभीर विमर्श हुआ। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार इन मामलों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
गृह जिले में तबादले की मांग तेज
सदन में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी ने महिला शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिला शिक्षकों का तबादला दूर-दराज के जिलों में कर दिया जाता है, जिससे उन्हें पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। खासकर छोटे बच्चों की देखभाल, बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी और लंबी दूरी की यात्रा उनके लिए चुनौती बन जाती है। राबड़ी देवी ने सरकार से आग्रह किया कि महिला शिक्षकों को उनके गृह जिले में पदस्थापित किया जाए, ताकि वे परिवार और नौकरी के बीच संतुलन बना सकें। उन्होंने यह भी कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
शिक्षा मंत्री का आश्वासन
विपक्ष की मांग पर शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार महिला शिक्षकों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि महिला शिक्षकों के स्थानांतरण के मामले में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। मंत्री ने संकेत दिया कि इस विषय पर विभागीय स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही नीति के अनुरूप कदम उठाए जाएंगे। मंत्री के इस आश्वासन के बाद सदन में कुछ हद तक संतोष का माहौल देखने को मिला। हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर जल्द ठोस कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
शिशु देखभाल अवकाश पर भी उठे सवाल
सदन में महिला कर्मियों को 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश देने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जानकारी दी गई कि राज्यपाल सचिवालय की अनुशंसा के बावजूद शिक्षा विभाग में अब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर वामपंथी दल के सदस्य संजय कुमार सिंह ने सभी शिक्षकों को 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों की परवरिश के लिए पर्याप्त समय मिलना आवश्यक है, ताकि महिलाएं नौकरी और मातृत्व दोनों जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें। उनका तर्क था कि यदि अन्य विभागों में इस प्रकार की सुविधा उपलब्ध है, तो शिक्षा विभाग में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
सरकार 15 दिनों में लेगी फैसला
शिक्षा मंत्री ने इस मुद्दे पर भी स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि अगले 15 दिनों के भीतर इस संबंध में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि महिला शिक्षकों को शिशु देखभाल अवकाश देने के प्रश्न पर सकारात्मक निर्णय की संभावना है। मंत्री के इस बयान से महिला शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि उन्हें लंबे समय से लंबित इस मांग पर राहत मिल सकती है।
मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान में सुधार
राजद के सदस्य डॉ. सुनील कुमार सिंह ने सदन में मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन भुगतान की व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले महिला शिक्षकों को मातृत्व अवकाश के दौरान नियमित वेतन नहीं मिल पाता था और भुगतान अवकाश समाप्त होने के बाद किया जाता था, जिससे आर्थिक दिक्कतें उत्पन्न होती थीं। इस पर शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब महिला शिक्षकों को मातृत्व अवकाश के दौरान हर महीने नियमित वेतन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए हैं। मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि मातृत्व अवकाश के साथ चिकित्सा अवकाश और अन्य देय भुगतान भी समय पर सुनिश्चित किए जाएंगे। इससे महिला शिक्षकों को आर्थिक असुरक्षा की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
महिला शिक्षकों के हित में अहम संकेत
विधान परिषद में हुई इस चर्चा को महिला शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृह जिले में पोस्टिंग, शिशु देखभाल अवकाश और मातृत्व अवकाश के दौरान नियमित वेतन जैसी मांगें लंबे समय से उठाई जा रही थीं। अब सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इन मुद्दों पर ठोस निर्णय सामने आएंगे। महिला शिक्षकों का कहना है कि यदि ये फैसले लागू होते हैं तो इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि पारिवारिक जीवन में भी संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार के आगामी निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि शिक्षा मंत्री ने समय सीमा तय करते हुए 15 दिनों के भीतर फैसला लेने की बात कही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सदन में दिए गए आश्वासन कितनी तेजी से धरातल पर उतरते हैं।


