बांग्लादेश के आम चुनाव में बीएनपी पार्टी की जीत, पीएम बनेंगे तारिक रहमान, नरेंद्र मोदी ने दी बधाई
नई दिल्ली। बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव कर दिया है। लगभग दो दशकों बाद तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सत्ता में वापसी की है। 299 सदस्यीय संसद में से 286 सीटों के घोषित नतीजों में बीएनपी को 209 सीटें मिली हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े से काफी अधिक है। इस जीत के साथ ही तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
दो दशक बाद सत्ता में वापसी
साल 2008 से 2024 तक आवामी लीग के नेतृत्व में शेख हसीना का दबदबा रहा। इस अवधि में विपक्षी बीएनपी सत्ता से बाहर रही। अब करीब 20 वर्षों के अंतराल के बाद बीएनपी ने सत्ता में वापसी की है। चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को 70 सीटें मिली हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की। हालांकि स्पष्ट बहुमत बीएनपी के पक्ष में जाने से सरकार गठन में किसी सहयोगी दल की जरूरत नहीं पड़ेगी।
तारिक रहमान का राजनीतिक सफर
तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं। उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। वह पिछले वर्ष दिसंबर में 17 साल बाद ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के कुछ ही दिनों बाद उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई। तारिक पर 2001 से 2006 के बीएनपी शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के समय उन्हें जेल भी जाना पड़ा। 2008 में इलाज के नाम पर वे लंदन चले गए और लंबे समय तक वहीं रहे। देश से बाहर रहते हुए भी बीएनपी की रणनीति और संगठनात्मक फैसलों में उनकी अहम भूमिका बनी रही।
पुरुष प्रधानमंत्री की वापसी
इस चुनाव के साथ बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहा है। 1988 में काजी जफर अहमद के बाद से देश की राजनीति में शेख हसीना और खालिदा जिया का वर्चस्व रहा। 1991 से 2024 तक इन दोनों महिला नेताओं के बीच सत्ता का परिवर्तन होता रहा। शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला आम चुनाव था। उल्लेखनीय है कि आवामी लीग को इस चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। चुनाव आयोग ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में कथित भूमिका के आधार पर यह फैसला लिया था।
संविधान सुधार पर जनमत संग्रह
चुनाव के साथ ही संविधान सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर जनमत संग्रह भी कराया गया। शुरुआती रुझानों में ‘हां’ के पक्ष में बढ़त दिखाई दे रही है। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो प्रधानमंत्री की कुछ शक्तियां सीमित होंगी और राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ाई जाएंगी। प्रस्तावों के अनुसार, देश में द्विसदनीय संसद की स्थापना होगी। संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सत्ता पक्ष, विपक्ष और न्यायपालिका के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक ही प्रधानमंत्री बने रहने का प्रावधान किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम बांग्लादेश की जनता के विश्वास को दर्शाता है। मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी बीएनपी और तारिक रहमान को शुभकामनाएं दीं और बांग्लादेश की जनता को सफल चुनाव के लिए बधाई दी। अमेरिका ने दोनों देशों के साझा विकास और सुरक्षा लक्ष्यों पर मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
आवामी लीग का आरोप
शेख हसीना ने चुनाव को दिखावटी और पूर्व निर्धारित करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान प्रक्रिया के दौरान कई अनियमितताएं हुईं। आवामी लीग ने दावा किया कि कई मतदान केंद्रों पर कब्जा, गोलियां चलने और मतपत्रों पर जबरन मुहर लगाने जैसी घटनाएं सामने आईं। हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नई सरकार के सामने चुनौतियां
तारिक रहमान ने चुनाव प्रचार के दौरान पर्यावरण संरक्षण, तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी। उन्होंने हर वर्ष पांच करोड़ पेड़ लगाने और ढाका में नए हरित क्षेत्र विकसित करने का वादा किया है। अब उनकी अगुवाई में बनने वाली सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक ध्रुवीकरण और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित रखने की चुनौती होगी। बांग्लादेश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह अमल में लाती है।


