February 12, 2026

निशिकांत दुबे ने संसद में रखा प्रस्ताव, कहा- राहुल के बयान से आपत्ति, उनके चुनाव लड़ने पर लगे रोक

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने लोकसभा में एक प्रस्ताव पेश कर राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है। इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।
निशिकांत दुबे का आरोप और प्रस्ताव
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ विशेष प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ऐसे बयान देकर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी अंतरराष्ट्रीय ताकतों के प्रभाव में आकर भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली बातें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता देश की छवि को खराब करने का काम कर रहे हैं। दुबे ने अपने प्रस्ताव में मांग की कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त की जाए और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोका जाए।
राहुल गांधी के बयान से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद राहुल गांधी के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस समझौते के जरिए देश के हितों से समझौता किया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस तरह के समझौते के लिए शर्म आनी चाहिए और इस समझौते को भारत के सम्मान के खिलाफ बताया था। राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें अपने पद की गंभीरता को समझना चाहिए। पासवान ने कहा कि संसद में किसी भी नेता को मर्यादा बनाए रखनी चाहिए और बिना ठोस आधार के इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषाधिकार प्रस्ताव संसद के सदस्यों का अधिकार होता है और यदि कोई सदस्य अनुचित टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव पर क्या निर्णय होगा, यह अभी तय नहीं है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राहुल गांधी की टिप्पणी
राहुल गांधी ने संसद में बोलते हुए कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से देश के किसानों को नुकसान पहुंच सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि उनकी पार्टी की सरकार होती तो वह अमेरिका के साथ बातचीत में भारतीय डेटा को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पूंजी के रूप में प्रस्तुत करती। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बराबरी के आधार पर बातचीत करनी चाहिए।
भारतीय डेटा और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि भारत के डेटा को आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि अमेरिका अपनी आर्थिक व्यवस्था को मजबूत रखना चाहता है तो उसे भारतीय डेटा की अहमियत को समझना होगा। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में समझौते का विषय नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे अमेरिका अपने किसानों के हितों की रक्षा करता है, वैसे ही भारत को भी अपने किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति पर टिप्पणी
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भारत को कमजोर स्थिति में पेश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन की सरकार होती तो वह किसी भी प्रकार के प्रतीकात्मक अपमान का विरोध करती और भारत की प्रतिष्ठा को बनाए रखने का प्रयास करती।
संसद और राजनीति में बढ़ता टकराव
इस मुद्दे को लेकर संसद में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। भाजपा जहां राहुल गांधी के बयान को देश के हितों के खिलाफ बता रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष का काम सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना होता है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी ने किसानों और देश के हितों को लेकर अपनी राय व्यक्त की है, जिसे लोकतंत्र का हिस्सा माना जाना चाहिए।
आगे की प्रक्रिया और संभावित कार्रवाई
निशिकांत दुबे द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर संसद में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। संसदीय नियमों के अनुसार विशेषाधिकार प्रस्ताव की जांच की प्रक्रिया होती है, जिसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाता है। फिलहाल इस मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी बयानबाजी
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी को तेज कर दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं और अपने-अपने तर्क पेश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक गलियारों में और चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है और सभी की नजर इस पर टिकी हुई है।

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