February 12, 2026

विधानसभा में डिप्टी सीएम का बड़ा ऐलान, कहा- भूमि सर्वे के लिए चलेगा विशेष अभियान, करवाया जाएगा सर्वेक्षण

पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को भूमि सर्वेक्षण का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। प्रश्नकाल के दौरान असर्वेक्षित जमीनों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच चर्चा हुई। इस दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से बड़ा ऐलान किया गया कि जिन जमीनों का अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ है, उनके लिए विशेष अभियान चलाकर सर्वे का काम पूरा कराया जाएगा।
सदन में उठा असर्वेक्षित जमीन का मुद्दा
प्रश्नकाल के दौरान विधायक मंजीत कुमार सिंह ने सरकार से सवाल किया कि राज्य में करीब 20 प्रतिशत भूमि अब भी बिना सर्वे के है। उन्होंने कहा कि बिना सर्वेक्षण वाली जमीनों की वजह से न तो जमाबंदी सही तरीके से हो पा रही है और न ही लगान निर्धारित हो पा रहा है। इससे किसानों और आम लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विधायक ने सरकार से समय-सीमा तय करने की मांग की, ताकि असर्वेक्षित जमीनों का जल्द सर्वेक्षण कराया जा सके और लोगों को कानूनी स्पष्टता मिल सके।
मंत्री का जवाब और विशेष अभियान की घोषणा
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जवाब देते हुए कहा कि सदस्य की चिंता पूरी तरह जायज है। उन्होंने स्वीकार किया कि असर्वेक्षित भूमि के कारण किसानों को अनुदान मिलने में परेशानी हो रही है और कई लोग जमीन की खरीद-बिक्री भी नहीं कर पा रहे हैं। मंत्री ने बताया कि राज्य में भूमि सर्वेक्षण का कार्य वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। वर्ष 2015 में इसकी समीक्षा की गई और 2019 में इसमें कई सुधार किए गए। अब सरकार ने लक्ष्य रखा है कि शेष सर्वेक्षण का काम अगले दो वर्षों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
किसानों की परेशानी पर चिंता
मंत्री ने कहा कि बिना सर्वेक्षण वाली भूमि के कारण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में जमीन के कागजात स्पष्ट नहीं होने से बैंक ऋण और अन्य सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग तेजी से काम कर रहा है, ताकि सर्वेक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सके।
परिमार्जन के लंबित आवेदन
सदन में यह भी बताया गया कि भूमि अभिलेखों के परिमार्जन से जुड़े करीब 40 लाख आवेदन लंबित हैं। मंत्री ने कहा कि विभाग ने इन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लंबित आवेदनों के निष्पादन के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिससे लोगों की समस्याओं का समाधान हो सके और जमीन से जुड़े विवाद कम हों।
दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने स्पष्ट किया कि शेष भूमि सर्वेक्षण को दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी की जा रही है। विशेष अभियान के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां सर्वेक्षण का कार्य अब तक नहीं हुआ है या अधूरा है। मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण पूरा होने से जमीन की जमाबंदी और लगान निर्धारण की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। इससे राजस्व संग्रह भी व्यवस्थित होगा और किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत मिलेगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
भूमि सर्वेक्षण का मुद्दा बिहार में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। असर्वेक्षित जमीन के कारण कई जिलों में भूमि विवाद, कागजी उलझन और न्यायिक मामलों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में सरकार की यह घोषणा प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सदन में इस विषय पर व्यापक चर्चा के बाद मंत्री ने भरोसा दिलाया कि विभाग समय-सीमा के भीतर लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम करेगा।
आगे की राह
फिलहाल सरकार की ओर से विशेष अभियान चलाने की घोषणा के बाद अब सबकी नजर इस पर है कि जमीन पर यह अभियान कितनी तेजी से लागू होता है। यदि निर्धारित समय में सर्वेक्षण पूरा हो जाता है तो इससे लाखों किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिल सकती है। विधानसभा में दिए गए इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भूमि सर्वेक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और आने वाले दिनों में इस दिशा में ठोस कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

You may have missed