ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन का आज भारत बंद, बिहार में भी असर, पटना में यातायात बंद
पटना। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर बिहार में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। राजधानी पटना सहित कटिहार, मधेपुरा और दरभंगा समेत कई जिलों में श्रमिक संगठनों और कर्मचारी संघों के सदस्य सड़कों पर उतर आए। चार नई श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और कई स्थानों पर यातायात भी बाधित रहा।
पटना में प्रदर्शन और यातायात प्रभावित
राजधानी पटना में डाकबंगला चौराहा, कंकड़बाग और अन्य प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैनर और झंडों के साथ मार्च निकाला। कुछ स्थानों पर सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों और आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वामपंथी दल से जुड़ी विधान परिषद सदस्य शशि यादव भी प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इन्हें वापस लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह हड़ताल मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी कदम है।
कटिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम
कटिहार में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31 को जाम कर दिया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात कई घंटों तक प्रभावित रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। हालांकि कुछ समय तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
दरभंगा और मधेपुरा में विरोध
दरभंगा में राष्ट्रीय एंबुलेंस कर्मचारी संघ के सदस्यों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। मधेपुरा में माले कार्यकर्ताओं ने भारतीय स्टेट बैंक के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इन जिलों में भी हड़ताल का असर बैंकिंग और परिवहन सेवाओं पर देखने को मिला।
ट्रेड यूनियनों का दावा
हड़ताल का आह्वान अखिल भारतीय केंद्रीय श्रमिक संगठन परिषद सहित देश के दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न सेवा संघों ने किया है। संगठनों का आरोप है कि पहले मौजूद 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं लागू की गई हैं, जिनसे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे। पटना नगर निगम चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि नई व्यवस्था में यूनियन बनाने, हड़ताल करने, न्यूनतम मजदूरी पाने और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि पहले 25 कर्मचारी मिलकर यूनियन बना सकते थे, जबकि अब 300 कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, जिससे छोटे संगठनों की आवाज दब जाएगी।
बैंकिंग और आवश्यक सेवाओं पर असर
भारत बंद को अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला है। पटना में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक समेत कई बैंकों के कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। हड़ताल के कारण बिजली, बैंकिंग, बीमा, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर आंशिक असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि प्रशासन ने दावा किया कि आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं होने दिया जाएगा।
पूर्व विरोध मार्च और तैयारी
हड़ताल से पहले 11 फरवरी को भी श्रमिक संगठनों ने विरोध मार्च निकाला था। राजेंद्र नगर से कंकड़बाग तक जुलूस निकालकर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की गई थी। आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा कथित शोषण, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली में गड़बड़ी और वेतन कटौती जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक तैयारी
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से हड़ताल पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस गश्त बढ़ाई गई है और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आम जनजीवन पर प्रभाव
हड़ताल का असर आम जनजीवन पर आंशिक रूप से पड़ा है। कई स्थानों पर यात्री घंटों जाम में फंसे रहे, जबकि बैंकिंग कार्य प्रभावित होने से ग्राहकों को असुविधा हुई। हालांकि निजी संस्थान और कुछ सरकारी कार्यालय सामान्य रूप से खुले रहे।
आगे की रणनीति
श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने श्रम संहिताओं पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। फिलहाल बिहार में भारत बंद का असर कई जिलों में दिखा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या आंदोलन और तेज होता है।


