15 वर्ष से अधिक आयोग के बच्चों का आधार बायोमैट्रिक अनिवार्य, अक्टूबर तक निशुल्क रहेगी व्यवस्था
नई दिल्ली/पटना। आधार को लेकर केंद्र सरकार और प्रशासनिक तंत्र ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों के लिए आधार बायोमैट्रिक अपडेट अनिवार्य कर दिया गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अनुसार, देशभर में इस प्रक्रिया को तेज़ी से लागू किया जा रहा है और अक्टूबर तक यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क रखी गई है। इसे डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम फैसला माना जा रहा है।
एक करोड़ से अधिक बच्चों का अपडेट पूरा
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुताबिक, देश के लगभग 83 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों का अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि स्कूलों के माध्यम से इस अभियान को चलाने से बच्चों तक पहुंच आसान हुई और अभिभावकों को भी राहत मिली। सरकार इसे डिजिटल इंडिया की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।
क्यों जरूरी है बायोमैट्रिक अपडेट
यूआईडीएआई का कहना है कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का आधार नामांकन तो होता है, लेकिन इस दौरान फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली की जानकारी नहीं ली जाती। वजह यह है कि इस उम्र में बायोमैट्रिक पहचान स्थिर नहीं होती। ऐसे में जैसे ही बच्चा पांच वर्ष और फिर 15 वर्ष की उम्र पार करता है, उसका बायोमैट्रिक अपडेट कराना अनिवार्य हो जाता है। इसे ही अनिवार्य बायोमैट्रिक अपडेट कहा जाता है।
अपडेट नहीं कराया तो कहां आ सकती है दिक्कत
सरकारी तंत्र का साफ संकेत है कि अगर तय समय पर बायोमैट्रिक अपडेट नहीं कराया गया, तो आगे चलकर परेशानी हो सकती है। छात्रवृत्ति, सरकारी योजनाओं का लाभ, प्रतियोगी परीक्षाओं का पंजीकरण या विश्वविद्यालय स्तर की प्रवेश प्रक्रिया में आधार अपडेट न होने पर अड़चन आ सकती है। इसी वजह से सरकार लगातार इस प्रक्रिया को समय पर पूरा कराने की अपील कर रही है।
अक्टूबर तक मुफ्त रहेगी सुविधा
यूआईडीएआई ने सात से 15 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों के लिए बायोमैट्रिक अपडेट को एक तय अवधि तक पूरी तरह निशुल्क कर दिया है। यह सुविधा अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी। आम लोगों, खासकर मध्यम और गरीब तबके के लिए इसे राहत भरा कदम माना जा रहा है। आमतौर पर आधार अपडेट के लिए शुल्क देना पड़ता है, लेकिन इस अभियान के तहत किसी भी तरह की फीस नहीं ली जा रही है।
स्कूल बने सरकार का मजबूत जरिया
सरकार ने इस अभियान में स्कूलों को सबसे अहम कड़ी बनाया है। स्कूल परिसर में ही आधार अपडेट की व्यवस्था करने से बच्चों और अभिभावकों को आधार सेवा केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। यूआईडीएआई का दावा है कि इससे कवरेज तेजी से बढ़ा और समय की भी बचत हुई। शिक्षा संस्थानों की इस भागीदारी को सरकार डिजिटल इंडिया की सफलता के तौर पर गिना रही है।
माता-पिता के आधार की भूमिका
बच्चों का आधार बनवाने या अपडेट कराने में माता-पिता के आधार की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। अगर बच्चा पांच साल से कम उम्र का है, तो कम से कम एक माता-पिता या कानूनी अभिभावक का आधार होना जरूरी है। आम तौर पर मां के आधार से बच्चे का आधार लिंक किया जाता है, हालांकि पिता का आधार भी मान्य होता है। कानून की नजर में किसी एक का आधार पर्याप्त है।
जन्म प्रमाण पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज
आधार प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशानी दस्तावेजों को लेकर आती है। यूआईडीएआई बच्चे की पहचान और माता-पिता से संबंध का प्रमाण मांगता है। ज्यादातर मामलों में जन्म प्रमाण पत्र को सबसे भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता है। खासकर 1 अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। अगर यह दस्तावेज नहीं है, तो वैकल्पिक कागजात स्वीकार किए जा सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की परेशानी से बचने के लिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाना ही बेहतर है।
आधार केंद्र चुनना भी अहम
छोटे बच्चों को लेकर लंबी कतार में खड़ा होना अभिभावकों के लिए मुश्किल भरा होता है। ऐसे में सही आधार नामांकन या अपडेट केंद्र चुनना जरूरी है। नजदीकी आधार सेवा केंद्र, सरकारी अस्पताल या स्कूल में उपलब्ध सुविधा की जानकारी पहले से ले लेना फायदेमंद रहता है। यूआईडीएआई का भुवन पोर्टल आसपास के केंद्रों और उनके समय की जानकारी देता है, जिससे अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।
प्रक्रिया कैसी होती है केंद्र पर पहुंचने के बाद प्रक्रिया ज्यादा जटिल नहीं होती। ऑपरेटर बच्चे की बुनियादी जानकारी दर्ज करता है, फोटो ली जाती है और बायोमैट्रिक विवरण अपडेट किया जाता है। आवेदन को माता-पिता के आधार से लिंक कर दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो मोबाइल नंबर देना अनिवार्य है और न ही कोई शुल्क लिया जाता है।
पांच साल की उम्र में अहम पड़ाव
जैसे ही बच्चा पांच साल का होता है, उसका फोटो, फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतली का स्कैन पहली बार पूरी तरह लिया जाता है। आधार नंबर वही रहता है, नया आधार नहीं बनता। इसके बाद 15 साल की उम्र में दोबारा बायोमैट्रिक अपडेट जरूरी होता है।
सियासी और सामाजिक मायने
आधार बायोमैट्रिक अपडेट अब सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह शिक्षा, सामाजिक योजनाओं और सरकारी लाभों से सीधे जुड़ा मुद्दा बन चुका है। मुफ्त अपडेट की घोषणा के साथ सरकार ने साफ संकेत दिया है कि आधार को लेकर उसकी नीति सख्त और स्पष्ट है। अब देखना यह होगा कि इस अभियान का असर जमीन पर कितना व्यापक और प्रभावी साबित होता है।


