February 11, 2026

विधानसभा में बड़ा हादसा टला, मुख्य भवन का अचानक गिरा छज्जा, बाल-बाल बचे विधायक

पटना। बिहार विधानसभा परिसर में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब मुख्य भवन का छज्जा अचानक झरझराकर गिर पड़ा। गनीमत यह रही कि जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त वहां कोई विधायक, कर्मचारी या आम व्यक्ति मौजूद नहीं था। यदि यह हादसा कुछ मिनट पहले या बाद में होता, तो बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था। इस घटना के बाद विधानसभा परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। बताया जा रहा है कि बिहार विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों जारी है और शुक्रवार को सत्र का चौथा दिन था। सुबह से ही दोनों सदनों के सदस्य सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए परिसर में पहुंच रहे थे। इसी दौरान मुख्य भवन का एक हिस्सा, यानी छज्जा, अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। सौभाग्य से उस समय वहां कोई खड़ा नहीं था, जिससे किसी तरह की चोट या जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छज्जा गिरने की आवाज काफी तेज थी, जिससे आसपास मौजूद लोग घबरा गए। कुछ देर के लिए पूरे परिसर में हलचल मच गई। सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर क्षेत्र को घेर लिया और वहां से आवाजाही रोक दी गई। इसके बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई और भवन की स्थिति का प्रारंभिक निरीक्षण किया गया। इस घटना ने विधानसभा भवन में हाल ही में कराए गए मरम्मत और सौंदर्यीकरण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, बजट सत्र से पहले विधानसभा भवन में मरम्मत, रंग-रोगन और सजावट का व्यापक काम कराया गया था। लोकसभा अध्यक्ष के संभावित आगमन को देखते हुए परिसर को आकर्षक बनाने और विभिन्न हिस्सों को दुरुस्त करने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे थे। इसके लिए बाकायदा निविदाएं भी जारी की गई थीं और कई एजेंसियों को काम सौंपा गया था। इसके बावजूद मुख्य इमारत का हिस्सा गिर जाना यह संकेत देता है कि या तो निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कमी रही, या फिर कार्य में लापरवाही बरती गई। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक या महत्वपूर्ण सरकारी भवन में मरम्मत के दौरान संरचनात्मक मजबूती की विशेष जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। घटना के बाद कई विधायकों और कर्मचारियों ने चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि यदि यह हादसा कार्यवाही के समय या भीड़भाड़ के दौरान होता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। कुछ जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पूरे विधानसभा भवन की तकनीकी जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं अन्य हिस्से भी कमजोर तो नहीं हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित निर्माण एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है और प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। भवन निर्माण विभाग की टीम से भी निरीक्षण कराने की तैयारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि छज्जा गिरने की असली वजह क्या रही। इसके साथ ही हाल में कराए गए सभी मरम्मत कार्यों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। फिलहाल इस घटना को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और परिसर के अन्य हिस्सों की भी जांच कराई जाएगी। वहीं, आम लोगों और कर्मचारियों में इस घटना के बाद असुरक्षा की भावना देखी जा रही है। यह हादसा भले ही किसी बड़ी क्षति के बिना टल गया हो, लेकिन इसने सरकारी भवनों की देखरेख और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदार एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल विधानसभा परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

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