मणिपुर में नई सरकार के खिलाफ कुकी समुदाय का विरोध प्रदर्शन, ‘टोटल शटडाउन’ का ऐलान, विधायकों को अल्टीमेटम
चुराचांदपुर। मणिपुर में नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य का राजनीतिक और सामाजिक माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन लागू रहने के बाद जब भारतीय जनता पार्टी के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब कुकी समुदाय से जुड़े संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। राज्य के कई इलाकों में प्रदर्शन तेज हो गया है और कुकी संगठनों ने कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में पूर्ण बंद का आह्वान किया है। इस घटनाक्रम ने मणिपुर की स्थिति को फिर से संवेदनशील बना दिया है।
नई सरकार के गठन से उपजा विवाद
बुधवार को भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के तेरहवें मुख्यमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह शपथ ग्रहण उस समय हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में कई महीनों तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा था। राष्ट्रपति शासन हटाने के बाद राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन सरकार के गठन के साथ ही विरोध की आवाजें उठने लगीं।
सरकार में संतुलन बनाने का प्रयास
नई सरकार में संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से दो उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं। इनमें नेमचा किपजेन, जो भाजपा विधायक हैं और कुकी समुदाय से आती हैं, को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा एल. दिखो, जो नगा पीपुल्स फ्रंट यानी नगा जनमोर्चा के विधायक हैं, को भी उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का यह कदम विभिन्न समुदायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इसके बावजूद कुकी संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
कुकी संगठनों ने किया पूर्ण बंद का ऐलान
चुराचांदपुर स्थित जनजातीय संगठन ज्वाइंट फोरम ऑफ सेवन यानी सात संगठनों का संयुक्त मंच ने शुक्रवार सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी-जो बहुल क्षेत्रों में पूर्ण बंद का आह्वान किया है। संगठन की मांग है कि कुकी समुदाय के लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार में शामिल होना समुदाय के हितों के खिलाफ है।
विधायकों को दी गई चेतावनी
कुकी-जो परिषद और कई उग्रवादी संगठनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि समुदाय का कोई विधायक अपनी इच्छा से सरकार में शामिल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी उसकी व्यक्तिगत होगी। संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसे फैसलों के बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों के लिए वे जिम्मेदार नहीं होंगे। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
विरोध प्रदर्शन ने पकड़ा जोर
सरकार के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद कांगपोकपी जिले के लीमाखोंग सहित कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर और बांस लगाकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया। विशेष रूप से नेमचा किपजेन को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शन के कारण कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जातीय हिंसा का पुराना इतिहास
मणिपुर में जातीय संघर्ष कोई नई बात नहीं है। तीन मई 2023 को राज्य में व्यापक जातीय हिंसा शुरू हुई थी। यह विवाद तब बढ़ा जब बहुसंख्यक मैतेई समुदाय ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की थी। इसके विरोध में कुकी समुदाय ने आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला था। इस संघर्ष ने पूरे राज्य को हिंसा की आग में झोंक दिया था।
हिंसा में भारी जनहानि और विस्थापन
जातीय हिंसा के दौरान लगभग 260 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें मैतेई, कुकी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए और अब भी राहत शिविरों में जीवन गुजार रहे हैं। इस हिंसा ने राज्य की सामाजिक संरचना और आपसी विश्वास को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
सरकार की शांति बहाली की कोशिश
केंद्र और राज्य सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही हैं। नई सरकार का गठन भी इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। हालांकि कुकी संगठनों का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि समुदायों के बीच विश्वास की कमी अभी भी बनी हुई है।
अलग प्रशासन की मांग बनी चुनौती
कुकी समुदाय द्वारा अलग प्रशासन की मांग और विधायकों पर दबाव राज्य की स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी समुदायों के बीच विश्वास और संवाद की प्रक्रिया मजबूत नहीं होगी, तब तक स्थायी शांति स्थापित करना कठिन होगा।
स्थिति पर प्रशासन की नजर
राज्य प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल मणिपुर की स्थिति नाजुक बनी हुई है। नई सरकार के गठन से उम्मीदें जरूर जगी हैं, लेकिन विरोध प्रदर्शन और अलग प्रशासन की मांग राज्य के सामने गंभीर चुनौती के रूप में उभर रही है। आने वाले दिनों में सरकार और समुदायों के बीच संवाद की प्रक्रिया ही राज्य की स्थिरता और शांति का रास्ता तय करेगी।


