February 11, 2026

16 को पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों का होगा विधानसभा मार्च, बीपीएससी कैलेंडर में टीआरई-4 को शामिल नहीं करने का करेंगे विरोध

पटना। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2026 तक आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी किए जाने के बाद शिक्षक अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है। आयोग द्वारा जारी परीक्षा कैलेंडर में शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 का उल्लेख नहीं होने से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष का माहौल है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को टाल रही है। इसी मुद्दे को लेकर 16 फरवरी को पटना में बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है, जिसमें राज्यभर से बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है।
विधानसभा मार्च का ऐलान
शिक्षक अभ्यर्थियों ने छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में विधानसभा मार्च करने का निर्णय लिया है। यह मार्च पटना कॉलेज से शुरू होकर बिहार विधानसभा तक जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया को लेकर सरकार स्पष्ट घोषणा नहीं कर रही है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। आंदोलन के माध्यम से अभ्यर्थी सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
प्रेस वार्ता में अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी
आंदोलन से पहले आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षक अभ्यर्थियों ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। इस दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में कई पोस्टर दिखाई दिए, जिनमें चुनाव से पहले किए गए वादों का जिक्र किया गया था। अभ्यर्थियों का कहना है कि चुनावी मंचों और सामाजिक माध्यमों पर शिक्षक भर्ती को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अब उन वादों को पूरा करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।
पोस्टरों में चुनावी वादों का जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान अभ्यर्थियों ने विभिन्न पोस्टरों के माध्यम से सरकार और सत्तारूढ़ दल द्वारा किए गए वादों को याद दिलाया। एक पोस्टर में लिखा गया था कि राज्य में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी और जल्द ही टीआरई-4 की बहाली शुरू होगी। साथ ही महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देने का भी आश्वासन दिया गया था। वहीं दूसरे पोस्टर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की घोषणाओं का हवाला देते हुए राज्य में 1.6 लाख शिक्षकों की भर्ती और महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही गई थी।
परीक्षा कैलेंडर में टीआरई-4 का जिक्र नहीं
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परीक्षा कार्यक्रम में 70वीं, 71वीं और 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा, न्यायिक सेवा, सहायक अभियोजन पदाधिकारी, तकनीकी और प्रशासनिक पदों सहित 50 से अधिक भर्तियों की संभावित तिथियां दी गई हैं। इसके अलावा विशेष शिक्षक और सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी जैसी भर्तियों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि पूरे कार्यक्रम में शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 का कहीं उल्लेख नहीं है। इसी वजह से अभ्यर्थियों के बीच यह आशंका बढ़ गई है कि सरकार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखा रही है।
भर्ती पदों की संख्या को लेकर भी असंतोष
अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार ने पहले एक लाख से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती का वादा किया था, लेकिन बाद में यह संख्या घटाकर लगभग 26 हजार कर दी गई। अब स्थिति यह है कि इतनी सीटों पर भी भर्ती की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं हो पा रही है। छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है और जमीन पर कोई ठोस पहल नहीं दिखाई दे रही है।
शिक्षा मंत्री ने दी थी सफाई
इस मुद्दे पर हाल ही में शिक्षा मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा था कि बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां पिछले दो वर्षों में लगभग 2.70 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया है और इसमें आरक्षण रोस्टर की मंजूरी जरूरी होती है। मंत्री के अनुसार विधानसभा चुनाव के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हुई।
रोस्टर मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के आधे जिलों से आरक्षण रोस्टर की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी जिलों से मंजूरी मिलने की प्रक्रिया जारी है। रोस्टर मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग आरक्षण नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने संकेत दिया था कि इस बार लगभग 25 हजार शिक्षक पदों पर भर्ती होने की संभावना है। साथ ही किस विषय में कितनी आवश्यकता है, इसका आकलन किया जा रहा है।
अभ्यर्थियों को जनवरी के बाद प्रक्रिया शुरू होने का भरोसा
शिक्षा मंत्री ने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया था कि जनवरी के बाद शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हालांकि परीक्षा कार्यक्रम में इसका उल्लेख नहीं होने से अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी कारण अभ्यर्थी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर हो गए हैं।
आंदोलन से बढ़ सकती है सियासी हलचल
16 फरवरी को प्रस्तावित विधानसभा मार्च को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना के कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस आंदोलन से राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज हो सकती है, क्योंकि शिक्षक भर्ती का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है। शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को लेकर जारी विवाद आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है। अब सबकी नजर सरकार और आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट घोषणा नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार का दावा है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जा रही हैं और जल्द ही शिक्षक भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी।

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