February 11, 2026

पटना जू की मादा जिराफ की हुई मौत, 21 साल की थी ‘शांति’, जू प्रशासन में शोक की लहर

पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान, पटना में मंगलवार देर रात एक दुखद घटना सामने आई, जब जू की मादा जिराफ ‘शांति’ का 21 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। शांति की मौत की खबर सामने आते ही जू प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। जू प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मौत का कारण गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताएं बताया जा रहा है। हालांकि, मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मौत के कारणों की जांच जारी
जू प्रशासन ने बताया कि शांति की मौत के बाद उसके शरीर से नमूने लेकर विशेषज्ञ संस्थानों में भेजे गए हैं। इन नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। जू के अधिकारियों के अनुसार, शांति पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से गुजर रही थी और डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी।
संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम में अहम भूमिका
मादा जिराफ शांति ने पटना जू और देश के अन्य चिड़ियाघरों में जिराफ संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शांति को जू प्रशासन के लिए बेहद खास माना जाता था, क्योंकि उसके माध्यम से जिराफ प्रजाति के विस्तार में बड़ा योगदान मिला था।
शांति के जन्म और पटना जू आगमन की कहानी
शांति का जन्म 20 जुलाई 2005 को अमेरिका के सेन डियागो चिड़ियाघर में हुआ था। वर्ष 2006 में वन्यजीवों के आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत उसे पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान लाया गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न देशों और चिड़ियाघरों के बीच दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देना था। पटना जू में आने के बाद शांति ने यहां के वातावरण में खुद को अच्छी तरह ढाल लिया और धीरे-धीरे जू का प्रमुख आकर्षण बन गई।
छह बच्चों को जन्म देकर बढ़ाया जिराफ परिवार
पटना जू में रहते हुए शांति ने वर्ष 2011 में अपने पहले बच्चे ‘नव्या’ को जन्म दिया था। इसके बाद वर्ष 2011 से लेकर 2023 तक उसने कुल छह बच्चों को जन्म दिया। शांति के बच्चों ने देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में जिराफ प्रजाति को बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उसके बच्चों को नंदनकानन चिड़ियाघर भुवनेश्वर, गुवाहाटी चिड़ियाघर असम और मैसूर चिड़ियाघर कर्नाटक जैसे प्रतिष्ठित चिड़ियाघरों को भेजा गया।
परिवार में रह गए दो बच्चे
फिलहाल शांति के दो बच्चे ‘अमन’ और ‘नंदनी’ पटना जू में मौजूद हैं। जू प्रशासन इन दोनों की विशेष देखभाल कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शांति की मृत्यु के बाद इन बच्चों की निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण को और मजबूत किया गया है, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ठंड से बचाव के लिए किए गए थे विशेष इंतजाम
पटना जू प्रशासन द्वारा हाल के ठंड के मौसम को देखते हुए वन्यजीवों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। जिराफ जैसे संवेदनशील जानवरों के लिए खुले मैदान में पुआल बिछाया गया था, ताकि वे ठंड से बच सकें और आराम से बैठ सकें। इसके अलावा उनके रहने के स्थान पर तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था भी की गई थी।
जू प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों में शोक
शांति की मौत से जू प्रशासन के कर्मचारियों के बीच भी भावुक माहौल देखा गया। लंबे समय तक जू में रहने के कारण शांति वहां के कर्मचारियों और दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय थी। वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि शांति ने जिराफ संरक्षण अभियान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।
वन्यजीव संरक्षण के लिए बढ़ती चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि चिड़ियाघरों में वन्यजीवों का संरक्षण और प्रजनन एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। जिराफ जैसी प्रजातियों की देखभाल के लिए विशेष वातावरण, संतुलित आहार और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। शांति जैसे वन्यजीवों का योगदान संरक्षण कार्यक्रमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
भविष्य की योजना और संरक्षण प्रयास
जू प्रशासन ने बताया कि शांति की मृत्यु के बाद भी जिराफ संरक्षण कार्यक्रम को जारी रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जू में मौजूद अन्य जिराफों की देखभाल और प्रजनन कार्यक्रम को और मजबूत किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। पटना जू में शांति का योगदान लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उसने न केवल जिराफ प्रजाति के विस्तार में भूमिका निभाई, बल्कि दर्शकों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। शांति की मृत्यु वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति मानी जा रही है, लेकिन जू प्रशासन का कहना है कि उसके प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए संरक्षण अभियान को और मजबूत बनाया जाएगा।

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