January 29, 2026

लैंड फॉर जॉब मामले में कोर्ट में सुनवाई, 1 से 15 फरवरी के बीच लालू परिवार को पेश होने का आदेश

नई दिल्ली/पटना। बहुचर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में गुरुवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया। अदालत ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों को औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए सशरीर पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट के निर्देश के अनुसार 1 फरवरी से 25 फरवरी के बीच राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव को अदालत में उपस्थित होना होगा।
आज की सुनवाई में कौन-कौन रहा मौजूद
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान पाटलिपुत्र से राजद सांसद और लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती तथा उनकी बहन हेमा यादव अदालत में पेश हुईं। दोनों ही इस मामले में आरोपी हैं। कोर्ट के सामने पेश होकर उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और इसके बाद अदालत ने आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा तय की।
9 मार्च से शुरू होगी नियमित सुनवाई
अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि 9 मार्च से इस मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी। इस दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से सबूत पेश किए जाएंगे और गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई रोजाना की जा सकती है, ताकि ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो।
चार्जशीट और आरोप तय होने का मामला
इससे पहले 9 जनवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू परिवार सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। वहीं, 52 लोगों को इस मामले में बरी कर दिया गया था। अदालत का मानना है कि जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनके मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए।
अदालत की सख्त टिप्पणी
पिछली सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह मामला केवल अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने एक संगठित तरीके से सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। अदालत के अनुसार, सरकारी पदों के बदले अचल संपत्ति हासिल करने की एक व्यापक साजिश रची गई थी।
सीबीआई की दलीलों को मिली अहमियत
अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से पेश की गई दलीलों और दस्तावेजों पर विचार करते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत सामग्री से गंभीर आरोपों के संकेत मिलते हैं। कोर्ट ने माना कि इस मामले में नौकरी और जमीन के बीच कथित लेन-देन की जांच जरूरी है, जिसे ट्रायल के दौरान विस्तार से परखा जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि यह एक संगठित आपराधिक साजिश का मामला प्रतीत होता है, जिसे लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए अंजाम दिया गया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। बचाव पक्ष को पूरा मौका दिया जाएगा कि वह ट्रायल के दौरान सीबीआई के साक्ष्यों को चुनौती दे और अपना पक्ष मजबूती से रखे।
मामले की पृष्ठभूमि क्या है
सीबीआई के अनुसार यह कथित साजिश वर्ष 2004 से 2009 के बीच रची गई, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। इस दौरान मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर समेत रेलवे के विभिन्न जोनों में बड़ी संख्या में लोगों को समूह-डी पदों पर नियुक्त किया गया। आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले संबंधित व्यक्तियों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी एक निजी कंपनी के नाम ट्रांसफर की। जांच एजेंसी का दावा है कि अधिकांश मामलों में नौकरी मिलने से पहले ही जमीन का हस्तांतरण कर दिया गया था और कई मामलों में उपहार पत्र के जरिए यह लेन-देन दिखाया गया। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि लालू यादव के करीबी माने जाने वाले भोला यादव ने गांवों में जाकर लोगों से कहा था कि नौकरी के बदले जमीन परिवार के नाम कर दी जाए।
परिवार के कई सदस्य आरोपी
इस मामले में सिर्फ लालू प्रसाद यादव और उनके बेटों को ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया गया है। सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया गया है। सीबीआई का कहना है कि इनके नाम भी कथित तौर पर नाममात्र की कीमत पर जमीन ट्रांसफर की गई थी।
आगे की राह
कोर्ट ने अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामलों में प्रक्रिया तेज करने के निर्देश सीबीआई को दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 29 जनवरी तय की गई है। इस बीच लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील का विकल्प भी चुन सकता है। फिलहाल इस मामले में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने से बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

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