January 27, 2026

मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए बोर्ड तैयार, सीसीटीवी से निगरानी, एआई से होगी मॉनिटरिंग

पटना। बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को लेकर इस बार व्यापक और सख्त व्यवस्था की गई है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और किसी भी तरह की अनियमितता पर रोक लगाने के लिए बोर्ड ने तकनीक और प्रशासन दोनों स्तर पर मजबूत इंतजाम किए हैं। इंटरमीडिएट की परीक्षा 1 फरवरी से और मैट्रिक की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होने जा रही है। इसको लेकर परीक्षा केंद्रों से लेकर कंट्रोल रूम तक निगरानी का दायरा बढ़ा दिया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार परीक्षा में लापरवाही, नकल या फर्जीवाड़े को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। हर परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से लेकर परीक्षा कक्ष तक सख्त निगरानी रहेगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास भी पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या अव्यवस्था को रोका जा सके। बोर्ड का उद्देश्य है कि परीक्षार्थी पूरी तरह शांत और सुरक्षित माहौल में परीक्षा दे सकें और अनुशासन बना रहे।
सीसीटीवी से हर गतिविधि पर नजर
इस बार सभी परीक्षा केंद्रों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया है। परीक्षा कक्ष, प्रवेश द्वार और संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की निगरानी सीधे कंट्रोल रूम से की जाएगी। कंट्रोल रूम में प्रशिक्षित कर्मी लगातार लाइव फुटेज पर नजर रखेंगे। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारी और केंद्राधीक्षक को दी जाएगी, ताकि मौके पर ही कार्रवाई की जा सके।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी पूरी परीक्षा प्रक्रिया
बोर्ड ने परीक्षा से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। ऑनलाइन आवेदन, परीक्षा केंद्र आवंटन, उपस्थिति, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने तक हर चरण को डिजिटल किया गया है। इसका उद्देश्य न केवल पारदर्शिता बढ़ाना है, बल्कि मानवीय त्रुटियों और गड़बड़ियों की संभावना को भी कम करना है। डिजिटल सिस्टम के जरिए रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं और किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ की गुंजाइश कम हो जाती है।
एआई तकनीक से होगी सख्त निगरानी
इस बार परीक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। एआई की मदद से फर्जी दस्तावेजों की पहचान की जाएगी और किसी और के बदले परीक्षा देने वालों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा। कई बार यह देखा गया है कि छात्र फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर परीक्षा में बैठ जाते हैं या अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा दिलवाते हैं। एआई सिस्टम ऐसे मामलों को तुरंत चिन्हित कर लेगा।
पुराने सर्टिफिकेट की भी होगी जांच
बोर्ड के अनुसार एआई तकनीक के जरिए वर्ष 1985-86 तक के पुराने सर्टिफिकेट की भी जांच की जा सकती है। इसमें नाम, जन्मतिथि, हस्ताक्षर, पता और आधार से जुड़े आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी छात्र फर्जी पहचान या गलत दस्तावेज के आधार पर परीक्षा में शामिल न हो सके। इससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट पर पूरी तरह प्रतिबंध
परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, कैमरा या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि परीक्षा हॉल में ऐसे किसी भी उपकरण के साथ पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें परीक्षा रद्द करने से लेकर भविष्य की परीक्षाओं से वंचित करने तक का प्रावधान शामिल है।
कंट्रोल रूम से होगी त्वरित कार्रवाई
राज्य स्तर और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। यहां से परीक्षा केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी। अगर किसी केंद्र से गड़बड़ी या अनुशासनहीनता की सूचना मिलती है, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित केंद्र पर अतिरिक्त पुलिस बल भी भेजा जा सकता है। बोर्ड ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी शिकायत या सूचना को हल्के में न लें।
छात्रों और अभिभावकों से बोर्ड की अपील
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि परीक्षा में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखें। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचें और प्रवेश पत्र तथा पहचान पत्र साथ लेकर आएं। किसी भी तरह के अनुचित साधनों से दूर रहें और पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दें। अभिभावकों से भी आग्रह किया गया है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
डिजिटल सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और एआई तकनीक के इस्तेमाल से बिहार बोर्ड की परीक्षा प्रणाली पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बन गई है। इससे न केवल नकल और फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि मेहनती और ईमानदार छात्रों का मनोबल भी बढ़ेगा। बोर्ड की यह पहल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

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