जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर पटना में राजकीय कार्यक्रम, मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने किया नमन
पटना। शनिवार को बिहार की राजनीति और सामाजिक जीवन के लिए एक विशेष दिन रहा, जब जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पटना में राजकीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं से लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कर्पूरी ठाकुर की जयंती केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह उनके विचारों, संघर्षों और सामाजिक न्याय के प्रति उनके योगदान को याद करने का अवसर बनी।
विधानसभा परिसर में हुआ मुख्य राजकीय कार्यक्रम
कर्पूरी ठाकुर की जयंती के मौके पर बिहार विधानसभा परिसर में स्थित उनकी विशाल प्रतिमा पर सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, विजय चौधरी सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कर्पूरी ठाकुर को नमन करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन और सादगीपूर्ण राजनीति को याद किया। कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला।
राज्यपाल ने भी अर्पित की श्रद्धांजलि
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी विधानसभा परिसर पहुंचे और जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर भारतीय राजनीति के उन नेताओं में थे, जिन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाया, जो आज भी प्रासंगिक हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा का राजनीतिक संदेश
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कर्पूरी ठाकुर के जीवन से सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने अभावों में रहते हुए भी समाज में गहरी छाप छोड़ी। उनका आचरण, स्वभाव और सादगी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। विजय सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित करना उनके विचारों और संघर्षों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता का प्रतीक है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर से यह सीख लेनी चाहिए कि बिना दिखावे और अहंकार के भी जनमानस में सम्मान पाया जा सकता है।
जदयू कार्यालय में श्रद्धांजलि समारोह
कर्पूरी ठाकुर की जयंती के अवसर पर पटना स्थित जनता दल (यूनाइटेड) कार्यालय में भी विशेष श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी कार्यालय पहुंचकर कर्पूरी ठाकुर की तस्वीर पर माल्यार्पण किया और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान मंत्री विजय चौधरी और श्याम रजक सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। जदयू कार्यालय में बड़ी संख्या में महिलाएं और कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने कर्पूरी ठाकुर के विचारों को याद किया।
सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में कर्पूरी ठाकुर
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय और पिछड़े-वंचित वर्गों के उत्थान में दिए गए योगदान पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक नेता नहीं, बल्कि लोगों के दिलों की धड़कन थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में समाज के कमजोर वर्गों के लिए संघर्ष किया और सत्ता में रहते हुए भी आम आदमी की तरह जीवन जिया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर के विचारों को आगे बढ़ाते हुए उनके सपनों को जमीन पर उतारने का काम किया है।
राजनीतिक दलों में दिखी श्रद्धा की प्रतिस्पर्धा
कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उन्हें याद किया और अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही उनके विचारों को अपनाने की बात करते नजर आए। हालांकि, इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली। कुछ नेताओं ने इसे सामाजिक न्याय के प्रति जागरूकता का अवसर बताया, तो कुछ ने इसे राजनीतिक आत्ममंथन का समय कहा।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मानना था कि कर्पूरी ठाकुर का जीवन आज की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए जो कार्य किए, वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की भावना राजनीति में विश्वास बहाल करने का काम करती है।
समापन में श्रद्धा और संकल्प
कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों का समापन श्रद्धा और संकल्प के साथ हुआ। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यह संकल्प लिया कि वे जननायक के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें अपने आचरण और नीतियों में उतारने का प्रयास करेंगे। इस तरह पटना में मनाई गई कर्पूरी ठाकुर की जयंती न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह रही, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश भी बन गई।


