January 23, 2026

कटिहार में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़, 5 सालों से चल रहा था जिस्मफरोशी का धंधा, चाय दुकान की आड़ में गंदा काम

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पुलिस प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के भाटा टोला चौक पर चाय की एक मामूली सी दुकान की आड़ में पिछले पांच वर्षों से जिस्मफरोशी का धंधा चल रहा था। बाहर से देखने पर यह जगह रोजमर्रा की तरह चाय-नाश्ते की दुकान लगती थी, जहां लोग बेफिक्र होकर आते-जाते थे, लेकिन इसी सामान्य दिखने वाली दुकान के भीतर अनैतिक कारोबार का पूरा नेटवर्क सक्रिय था।
पांच साल से चल रहा था गुपचुप धंधा
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस सेक्स रैकेट को बसंती देवी नाम की महिला संचालित कर रही थी। आरोप है कि पिछले पांच वर्षों से वह इस चाय दुकान को ढाल बनाकर देह व्यापार का कारोबार चला रही थी। दिन में दुकान पर चाय पीने वालों की भीड़ रहती थी, जबकि शाम ढलते ही यहां संदिग्ध गतिविधियां शुरू हो जाती थीं। बाहरी युवकों का आना-जाना, देर रात तक हलचल और गांव की महिलाओं का बार-बार इस दुकान पर दिखना, धीरे-धीरे लोगों के शक का कारण बनने लगा था।
ग्रामीणों का सब्र टूटा
लंबे समय से चल रही इन गतिविधियों को लेकर गांव में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। लोग यह सवाल करने लगे थे कि आखिर प्रशासन की नजरों से यह सब कैसे छिपा हुआ है। गुरुवार को ग्रामीणों का सब्र उस वक्त टूट गया, जब उन्होंने एक युवक को आपत्तिजनक हालत में पकड़ लिया। बताया जाता है कि युवक को दुकान के भीतर संदिग्ध स्थिति में देखकर ग्रामीणों ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। इस घटना के बाद इलाके में हंगामा मच गया और लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए।
पुलिस से पहले जनता ने उठाया कदम
हैरानी की बात यह रही कि गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस का इंतजार करने के बजाय खुद ही युवक को पकड़कर पूछताछ शुरू कर दी। गांव वालों का आरोप है कि इससे पहले भी कई बार उन्होंने इस दुकान को लेकर आशंका जताई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों के दबाव के बीच युवक को आखिरकार मुफस्सिल थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया। हालांकि, इस दौरान कथित संचालिका बसंती देवी और उसके साथ मौजूद अन्य महिलाएं मौके से फरार होने में कामयाब रहीं।
पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांव के बीचो-बीच पांच साल तक इतना बड़ा अनैतिक धंधा कैसे चलता रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय लोग इसे पुलिस की लापरवाही मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि बिना मिलीभगत के इतने लंबे समय तक ऐसा कारोबार चल पाना मुश्किल है। हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।
जांच के दायरे में दुकान और नेटवर्क
पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवक से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कितने समय से यह रैकेट सक्रिय था और इसमें कितनी महिलाओं को जबरन या लालच देकर शामिल किया गया था। पुलिस अब चाय दुकान की भूमिका और उसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
गांव की सामाजिक छवि पर असर
इस घटना के बाद भाटा टोला चौक और आसपास के इलाके की सामाजिक छवि को गहरा झटका लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के अनैतिक धंधे से गांव का नाम बदनाम होता है और युवाओं पर इसका गलत असर पड़ता है। लोग चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह का कारोबार शुरू करने की हिम्मत न कर सके।
महिलाओं की भूमिका और मजबूरी का सवाल
इस पूरे मामले में एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि इस धंधे में शामिल महिलाओं की स्थिति क्या थी। क्या वे अपनी मर्जी से इस काम में थीं या किसी मजबूरी, दबाव या लालच के चलते उन्हें इसमें धकेला गया। सामाजिक संगठनों का कहना है कि जांच के दौरान इस पहलू को गंभीरता से देखा जाना चाहिए और यदि महिलाएं पीड़िता हैं, तो उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
आगे की कार्रवाई पर निगाहें
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। गांव में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। इस खुलासे के बाद पूरे कटिहार जिले में प्रशासन की सतर्कता पर चर्चा हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच कितनी निष्पक्ष और गहराई से होती है और क्या वाकई इस पांच साल पुराने सेक्स रैकेट के सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के शिकंजे में लाया जा सकेगा या फिर यह मामला भी वक्त के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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