छत्तीसगढ़ में फैक्ट्री में भारी विस्फोट, सात मजदूरों की मौत, कई की हालत गंभीर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में गुरुवार सुबह एक भीषण औद्योगिक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। बकुलाही (निपनिया) गांव स्थित रियल इस्पात स्पंज आयरन फैक्ट्री में हुए जोरदार विस्फोट में अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह हादसा उस समय हुआ, जब फैक्ट्री में रोजमर्रा की तरह उत्पादन कार्य चल रहा था। अचानक हुए धमाके ने न केवल फैक्ट्री परिसर को तबाह कर दिया, बल्कि आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
सुबह के वक्त हुआ जोरदार विस्फोट
जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा 22 जनवरी की सुबह हुआ। मजदूर अपने-अपने कार्य में जुटे हुए थे और स्पंज आयरन यूनिट में उत्पादन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक तेज धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि प्लांट का एक बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। मशीनें उखड़ गईं, दीवारें ढह गईं और गर्म धातु तथा मलबा चारों ओर फैल गया। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के गांवों के लोग भी सहम गए।
चीख-पुकार और अफरा-तफरी का मंजर
विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। मजदूर जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोग आग और गर्म मलबे की चपेट में आ गए, जिससे वे बुरी तरह झुलस गए। कुछ मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिनकी मदद के लिए साथी मजदूर और फैक्ट्री स्टाफ चीख-पुकार करते नजर आए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के लिए यह मंजर बेहद भयावह था।
प्रशासन और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही भाटापारा ग्रामीण थाना पुलिस, जिला प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंच गए। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कलेक्टर दीपक सोनी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की। फैक्ट्री परिसर को तुरंत खाली कराया गया और आसपास के क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया, ताकि किसी और अनहोनी से बचा जा सके।
शवों की बरामदगी और घायलों का इलाज
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से अब तक सात मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया, इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।
मलबे में दबे होने की आशंका, रेस्क्यू जारी
प्रशासन को आशंका है कि अभी भी कुछ मजदूर मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। इसी वजह से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और अन्य विशेषज्ञ टीमों की मदद से सघन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। भारी मशीनों और क्रेनों की सहायता से मलबा हटाया जा रहा है, ताकि किसी भी जीवित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बचाव कार्य में समय लग रहा है, क्योंकि मलबा बेहद भारी और गर्म है।
हादसे के कारणों पर सस्पेंस
फिलहाल विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन और औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने पूरे प्लांट को सील कर दिया है। उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि विस्फोट तकनीकी खराबी के कारण हुआ या फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। स्पंज आयरन फैक्ट्री जैसे संवेदनशील औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी होता है, लेकिन इस हादसे ने इन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल
इस भीषण हादसे के बाद औद्योगिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का कहना है कि कई फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण की भारी कमी है। मजदूरों को जोखिम भरे माहौल में काम करना पड़ता है। यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाता, तो शायद इस तरह की त्रासदी को टाला जा सकता था। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शोक और संवेदनाओं का दौर
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। परिजन फैक्ट्री और अस्पताल के बाहर अपनों की एक झलक पाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। राज्य सरकार की ओर से मुआवजे और घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है।
पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी
बलौदाबाजार-भाटापारा में हुआ यह हादसा केवल एक फैक्ट्री तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के औद्योगिक तंत्र के लिए एक चेतावनी है। यह हादसा बताता है कि यदि सुरक्षा मानकों में थोड़ी सी भी लापरवाही हुई, तो उसका परिणाम कितना भयावह हो सकता है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


