पटना में लड़कियों के लिए पप्पू यादव ने जारी किया हेल्पलाइन, मिलेगी मदद, सोशल मीडिया से दी जानकारी
पटना। एक नीट छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और उसके बाद हुई मौत की घटना ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर उभरा है। छात्रा मूल रूप से जहानाबाद की रहने वाली थी और पढ़ाई के सिलसिले में पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में रह रही थी। घटना के बाद से पुलिस की जांच पटना से लेकर जहानाबाद तक चल रही है, लेकिन अब तक इस मामले में ठोस नतीजे सामने नहीं आ सके हैं। इसी बीच, इस घटना ने गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा, वहां के नियम-कायदों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
पप्पू यादव की पहल और हेल्पलाइन की घोषणा
इस गंभीर माहौल के बीच पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने पटना और बिहार के अन्य जिलों में गर्ल्स हॉस्टलों में रहने वाली छात्राओं के लिए एक हेल्पलाइन जारी की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि किसी भी छात्रा को डरने की जरूरत नहीं है। यदि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी, असहजता, भय, शोषण या शैक्षणिक एवं आर्थिक सहायता की जरूरत हो, तो वे बिना किसी झिझक के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकती हैं। पप्पू यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट में साफ तौर पर लिखा कि छात्राओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी बेटी खुद को अकेला न समझे, जरूरत पड़ने पर वे हर कदम पर उनके साथ खड़े हैं। इस हेल्पलाइन के जरिए उन्होंने दो मोबाइल नंबर जारी किए हैं, जिन पर सीधे संपर्क किया जा सकता है।
गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा पर उठे सवाल
नीट छात्रा की मौत के बाद पटना समेत बिहार के कई शहरों में गर्ल्स हॉस्टलों की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लग रहे हैं कि कई हॉस्टल बिना किसी स्पष्ट नियम और निगरानी के चल रहे हैं। कई जगहों पर न तो सीसीटीवी कैमरे ठीक से काम कर रहे हैं और न ही वार्डन या प्रबंधन की जिम्मेदारी तय है। पप्पू यादव ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कई हॉस्टल संचालक नियमों का पालन नहीं करते, जिसकी वजह से वहां रहने वाली छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल संचालन में लापरवाही और मनमानी के कारण ही ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। अगर समय रहते प्रशासन सख्ती दिखाता और नियमित जांच होती, तो शायद इतनी बड़ी घटना को टाला जा सकता था।
पुलिस और सरकार के रवैये पर नाराजगी
नीट छात्रा की मौत के मामले में अब तक किसी बड़े आरोपी की गिरफ्तारी न होना भी लोगों की नाराजगी का कारण बना हुआ है। पप्पू यादव लगातार सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अगर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर अब तक संबंधित थाना प्रभारी को निलंबित क्यों नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी बिना पूरी जांच के ही निष्कर्ष निकालने की कोशिश कर रहे थे, जिससे मामले की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। इस रवैये ने आम लोगों और खासकर छात्राओं के मन में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।
एसआईटी जांच और अब तक की स्थिति
पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रह रही नीट छात्रा की मौत की जांच अब विशेष जांच दल यानी एसआईटी कर रही है। पुलिस का दावा है कि हर पहलू से मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी। हालांकि, अभी तक जांच की गति और परिणामों को लेकर संतोषजनक स्थिति नहीं बन पाई है। छात्रा के परिवार और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक न्याय अधूरा रहेगा। इस बीच, हेल्पलाइन जैसी पहल को लोग एक तात्कालिक राहत के रूप में देख रहे हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए व्यवस्था में बदलाव की मांग भी तेज हो गई है।
छात्राओं के लिए भरोसे का संदेश
पप्पू यादव द्वारा जारी की गई हेल्पलाइन का एक बड़ा उद्देश्य छात्राओं में भरोसा पैदा करना है। अक्सर देखा गया है कि डर, बदनामी या भविष्य को लेकर आशंका के कारण कई छात्राएं अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पातीं। हेल्पलाइन के जरिए उन्हें यह संदेश दिया गया है कि वे खुलकर अपनी बात कह सकती हैं और जरूरत पड़ने पर सामाजिक व कानूनी सहायता भी मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हॉस्टल में किसी प्रकार का शोषण, दबाव या असुरक्षा महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर आवाज उठाना ही सबसे बड़ा बचाव है।
आगे की राह और जरूरत
पटना की इस घटना ने साफ कर दिया है कि छात्राओं की सुरक्षा सिर्फ पुलिस या सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था सभी की साझा जिम्मेदारी है। हेल्पलाइन एक सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन इसके साथ-साथ हॉस्टलों के पंजीकरण, नियमित जांच, सुरक्षा मानकों और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करना भी जरूरी है। जब तक गर्ल्स हॉस्टलों में रहने वाली छात्राएं खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी, तब तक ऐसी घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में पप्पू यादव की यह पहल एक चेतावनी भी है और एक उम्मीद भी कि छात्राओं की आवाज को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


