January 23, 2026

यूपी चुनाव में सपा का ओवैसी से नहीं होगा गठबंधन, शिवपाल बोले- पार्टी को एआईएमआईएम की जरूरत नहीं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव के एक बयान ने राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाने का काम किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि समाजवादी पार्टी का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से किसी तरह का गठबंधन नहीं होने जा रहा है। शिवपाल यादव के इस बयान को सपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
2027 चुनाव को लेकर सपा का स्पष्ट रुख
शिवपाल सिंह यादव ने यह स्पष्ट कर दिया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किसी भी सूरत में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को न तो ओवैसी की जरूरत है और न ही उनकी पार्टी की। शिवपाल यादव के अनुसार, सपा अपने दम पर चुनाव लड़ने और सरकार बनाने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन को लेकर जो बातें सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने जोर देकर कहा कि पार्टी का जनाधार मजबूत है और वह जनता के भरोसे ही सत्ता में वापसी करेगी। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी पहले भी अकेले चुनाव लड़कर सरकार बना चुकी है और आगे भी ऐसा करने की ताकत रखती है।
ओवैसी और एआईएमआईएम पर साफ संदेश
शिवपाल यादव का बयान सीधे तौर पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन और उसके प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि सपा की विचारधारा और राजनीतिक दिशा स्पष्ट है और इसमें किसी तरह के भ्रम की गुंजाइश नहीं है। सपा को अपनी राजनीति के लिए किसी बाहरी सहारे की जरूरत नहीं है। बीते कुछ समय से यह चर्चा तेज थी कि भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दल एकजुट हो सकते हैं और इसी कड़ी में ओवैसी की पार्टी से भी बातचीत हो सकती है। लेकिन शिवपाल यादव के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि समाजवादी पार्टी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाने वाली।
सांसदों की बैठक और बयानों की गूंज
हाल ही में समाजवादी पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए अपने सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बाद सलेमपुर से सांसद रमाशंकर राजभर के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी थी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए जो भी दल साथ आना चाहता है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। हालांकि, रमाशंकर राजभर ने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके बयान को ओवैसी की पार्टी से जोड़कर देखा गया। क्योंकि अब तक समाजवादी पार्टी एआईएमआईएम को वोट काटने वाली पार्टी मानते हुए उससे दूरी बनाए रखती रही है। इसी कारण उनके बयान को गठबंधन की संभावनाओं से जोड़कर देखा गया, लेकिन शिवपाल यादव ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया।
बिहार चुनाव के बाद बदला सियासी माहौल
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी देखने को मिला है। बिहार में महागठबंधन को मिली हार के बाद विपक्षी दलों में आत्ममंथन का दौर शुरू हुआ। इसका असर समाजवादी पार्टी की रणनीति पर भी पड़ा। सपा नेतृत्व अब हर पहलू पर गंभीरता से विचार कर रहा है ताकि 2027 के चुनाव में कोई चूक न हो। बिहार में तेजस्वी यादव की हार को विपक्ष के लिए एक सबक के तौर पर देखा जा रहा है। इसी वजह से समाजवादी पार्टी भी अपने राजनीतिक समीकरणों को लेकर सतर्क है। हालांकि, शिवपाल यादव का बयान यह बताता है कि सपा इस सतर्कता के बावजूद अपने मूल रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति
अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले को और मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी का फोकस इन्हीं सामाजिक समूहों को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश करने पर है। सपा नेतृत्व का मानना है कि अगर पीडीए वर्ग पूरी मजबूती से पार्टी के साथ खड़ा रहा, तो किसी अन्य दल के सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसी रणनीति के तहत छोटे क्षेत्रीय दलों और सामाजिक संगठनों से संवाद जरूर किया जा रहा है, लेकिन एआईएमआईएम जैसे दलों के साथ औपचारिक गठबंधन से पार्टी फिलहाल दूरी बनाए रखना चाहती है।
गठबंधन की राजनीति पर विराम
शिवपाल यादव के बयान को समाजवादी पार्टी की ओर से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि सपा अपने रास्ते पर चलने वाली पार्टी है और उसे अपनी चुनावी ताकत पर पूरा भरोसा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व 2027 के चुनाव में गठबंधन की बजाय अपनी संगठनात्मक मजबूती और जनाधार पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओवैसी और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर शिवपाल यादव के बयान ने पूर्ण विराम लगा दिया है। अब यह साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी अकेले दम पर मैदान में उतरने की तैयारी में है और अपनी पारंपरिक राजनीति और रणनीति के साथ सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

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