January 23, 2026

झारखंड में माओवादियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़, 10 नक्सली ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

सिंहभूम। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक बार फिर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान हिंसक मुठभेड़ सामने आई है। गुरुवार की सुबह सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षाबलों और भाकपा (माओवादी) संगठन के नक्सलियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई। इस मुठभेड़ में अब तक 10 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना है, जिनमें एक बड़े इनामी नक्सली के भी शामिल होने की बात कही जा रही है। इलाके में फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं।
सारंडा के जंगल में कैसे शुरू हुई मुठभेड़
यह मुठभेड़ पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत सारंडा जंगल में हुई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इस इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी को लेकर गुप्त सूचना मिली थी। बताया गया कि माओवादी संगठन के कई सशस्त्र दस्ते यहां डेरा डाले हुए हैं। इसी इनपुट के आधार पर झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही सुरक्षाबल नक्सलियों के ठिकाने के करीब पहुंचे, खुद को घिरा देख नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद दोनों तरफ से भारी गोलीबारी होने लगी।
संयुक्त अभियान में कई बल शामिल
इस ऑपरेशन में सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीम शामिल थी। इन सभी बलों को नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान चलाने का विशेष अनुभव है। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ काफी देर तक चली, जिसमें सुरक्षाबलों ने रणनीतिक तरीके से जवाबी कार्रवाई की। सुरक्षाबलों की बढ़त को देखते हुए कुछ नक्सली जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे, जबकि कई नक्सली मुठभेड़ में मारे गए।
डीआईजी ने की मुठभेड़ की पुष्टि
पश्चिमी सिंहभूम के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षा बलों को नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। उन्होंने कहा कि अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और पूरे इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सुरक्षाबलों का लक्ष्य है कि फरार नक्सलियों को भी जल्द से जल्द पकड़ लिया जाए या निष्क्रिय किया जाए।
10 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना
किरीबुरू थाना क्षेत्र के कुमड़ी इलाके के पास सारंडा जंगल में हुई इस मुठभेड़ में 10 नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से एक नक्सली पर करीब एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। हालांकि सुरक्षाबलों की ओर से सभी मारे गए नक्सलियों की पहचान और इनामी राशि की आधिकारिक पुष्टि ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही की जाएगी। मुठभेड़ स्थल से हथियार और अन्य नक्सली सामान बरामद किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र क्यों है संवेदनशील
सारंडा और कोल्हान क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का गढ़ माना जाता है। यहां घने जंगल, पहाड़ी इलाके और सीमित संपर्क साधन नक्सलियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। इस इलाके में माओवादी संगठन के कई बड़े नेता सक्रिय बताए जाते हैं। इनमें मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु और अनल जैसे शीर्ष नक्सली शामिल हैं। इनके अलावा असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत और रापा मुंडा जैसे नाम भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं।
इनामी नक्सलियों पर कसा जा रहा शिकंजा
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वर्तमान समय में सारंडा क्षेत्र में 32 लाख से लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक के इनामी नक्सली सक्रिय हो सकते हैं। इन्हीं नक्सलियों की गिरफ्तारी या सफाए के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। दो दिन पहले ही सीआरपीएफ के डीजी ने जिला पुलिस मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में नक्सल विरोधी ऑपरेशन को और तेज करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। माना जा रहा है कि उसी रणनीति के तहत यह बड़ा अभियान चलाया गया।
सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी
मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। जंगल के अंदर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षाबल लगातार सर्च कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी नक्सली वहां छिपा न रह जाए। सुरक्षा कारणों से आसपास के गांवों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन की ओर से स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
नक्सलवाद के खिलाफ अभियान की बड़ी कड़ी
झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ यह मुठभेड़ एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखी जा रही है। सुरक्षाबलों का दावा है कि लगातार दबाव और सटीक खुफिया जानकारी के कारण नक्सल संगठन कमजोर पड़ रहा है। हालांकि जंगल और दुर्गम इलाकों के कारण चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। फिलहाल सारंडा में हालिया मुठभेड़ को नक्सलियों के खिलाफ अभियान में एक अहम सफलता माना जा रहा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र को पूरी तरह नक्सल मुक्त नहीं कर दिया जाता।

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