January 23, 2026

सड़क नियमों पर केंद्र सरकार सख्त, साल में पांच बार नियम तोड़ा तो रद्द होगा ड्राइविंग लाइसेंस

नई दिल्ली। सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। बार-बार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों पर अब सीधी कार्रवाई की जाएगी। सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या और नियमों के प्रति लापरवाही को देखते हुए केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में अहम संशोधन किया है। इसके तहत अब एक साल में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकेगा।
सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती की जरूरत
भारत में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। इन हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार, नियमों की अनदेखी और लापरवाह ड्राइविंग मानी जाती है। हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, रेड लाइट जंप करना जैसे नियमों को आमतौर पर हल्के में लिया जाता रहा है। सरकार का मानना है कि जब तक नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सड़क सुरक्षा की स्थिति में सुधार संभव नहीं है। इसी सोच के तहत यह नया कदम उठाया गया है।
नया नियम क्या कहता है
सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यदि कोई चालक एक कैलेंडर वर्ष के भीतर पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित या रद्द किया जा सकता है। यह नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि कई जगह इसे 1 जनवरी से लागू बताया गया है, लेकिन आधिकारिक अधिसूचना में इसे 2026 से प्रभावी बताया गया है।
लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया
नए नियम के तहत लाइसेंस निलंबित या रद्द करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और जिला परिवहन अधिकारी के पास होगा। किसी भी चालक का लाइसेंस रद्द करने से पहले संबंधित अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि चालक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिले। यानी बिना सुने सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। यह प्रक्रिया इसलिए रखी गई है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और पारदर्शिता बनी रहे।
हर साल होगी नई गिनती
इस नियम की एक अहम बात यह है कि उल्लंघनों की गिनती हर साल नए सिरे से होगी। पिछले वर्ष किए गए ट्रैफिक उल्लंघनों को अगले साल की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी चालक ने 2026 में चार बार नियम तोड़े और 2027 में फिर से नियम तोड़ता है, तो 2026 की गिनती 2027 में नहीं जोड़ी जाएगी। इससे यह साफ हो जाता है कि सरकार चालकों को सुधार का मौका भी देना चाहती है।
पहले किन मामलों में रद्द होता था लाइसेंस
अब तक मोटर वाहन कानून के तहत केवल 24 गंभीर मामलों में ही ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान था। इनमें गाड़ी चोरी, अपहरण में वाहन का इस्तेमाल, अत्यधिक तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और शराब पीकर वाहन चलाना जैसे अपराध शामिल थे। लेकिन नए संशोधन के बाद अब अपेक्षाकृत सामान्य माने जाने वाले उल्लंघन भी गंभीर माने जाएंगे, यदि वे बार-बार किए जाएं। हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और रेड लाइट जंप करना जैसे नियमों को पांच बार तोड़ना भी अब भारी पड़ सकता है।
चालान और ई-चालान की व्यवस्था
अधिसूचना में चालान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। वर्दीधारी पुलिस अधिकारी या अधिकृत अधिकारी मौके पर चालान काट सकेंगे। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों के जरिए ऑटो-जनरेटेड ई-चालान भी भेजे जाएंगे। चालक को चालान मिलने के बाद 45 दिनों के भीतर जुर्माना भरना होगा या अदालत में उसे चुनौती देनी होगी। यदि 45 दिनों के भीतर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह माना जाएगा कि चालक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है।
विशेषज्ञों की राय
इस नए कानून को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सड़क पर अनुशासन बढ़ेगा और लोग नियमों को गंभीरता से लेंगे। वहीं कुछ लोगों को आशंका है कि यह नियम दमनकारी साबित हो सकता है। पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरों से कटने वाले चालान अक्सर विवादों में रहते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए एक स्पष्ट और मजबूत मानक प्रक्रिया बनाई जानी चाहिए, ताकि गलत चालान से लोगों को परेशानी न हो।
सामान्य लोगों पर क्या असर पड़ेगा
इस नियम का सीधा असर आम वाहन चालकों पर पड़ेगा। जो लोग रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करते थे, उन्हें अब ज्यादा सतर्क रहना होगा। सरकार का उद्देश्य सजा देना नहीं, बल्कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। यदि लोग हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएं और ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें, तो न केवल उनका लाइसेंस सुरक्षित रहेगा, बल्कि सड़कें भी ज्यादा सुरक्षित बनेंगी।
सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
यह संशोधन सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की गंभीरता को दिखाता है। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सड़क पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर इस नियम का सही तरीके से पालन और निष्पक्ष रूप से क्रियान्वयन हुआ, तो आने वाले समय में सड़क हादसों की संख्या में कमी आने की उम्मीद की जा सकती है।

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