बिहार में 24 से 27 जनवरी तक बंद रहेंगे बैंक, छुट्टी और हड़ताल का रहेगा असर, जल्द पूरे करें काम
पटना। बिहार में बैंक से जुड़े काम करने वाले लोगों के लिए यह जानकारी बेहद अहम है। 24 से 27 जनवरी के बीच राज्य में लगातार चार दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं। इस अवधि में निजी और सरकारी दोनों तरह के बैंक अपनी नियमित सेवाएं नहीं दे पाएंगे। कारण है कि इन चार दिनों में सरकारी छुट्टियों के साथ-साथ बैंक कर्मचारियों की हड़ताल भी तय है। ऐसे में जिन ग्राहकों के जरूरी बैंकिंग काम लंबित हैं, उनके लिए समय रहते निपटारा करना जरूरी हो गया है, नहीं तो परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
छुट्टियों और हड़ताल का पूरा शेड्यूल
बैंक बंद रहने की यह श्रृंखला 24 जनवरी से शुरू होगी। 24 जनवरी को महीने का अंतिम शनिवार है, जिस दिन पहले से ही बैंक बंद रहते हैं। इसके बाद 25 जनवरी को रविवार है, जो साप्ताहिक अवकाश होता है। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इन तीन लगातार छुट्टियों के बाद 27 जनवरी को बैंक कर्मचारी यूनियनों ने राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस तरह चार दिन तक बैंक शाखाओं में ताले लटके रहेंगे।
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह
बिहार प्रोविंशियल बैंक कर्मचारी यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष के अनुसार, यह हड़ताल लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर की जा रही है। बैंक कर्मचारी पांच दिन काम और शनिवार-रविवार की छुट्टी की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते काम के दबाव और कर्मचारियों की कमी के कारण बैंककर्मियों को रोजाना 8 से 9 घंटे तक काम करना पड़ता है, कई बार देर रात तक शाखाओं में रुकना पड़ता है। ऐसे में सप्ताह में दो दिन की छुट्टी कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
बैंकिंग ढांचे पर पड़ेगा सीधा असर
राज्य में बैंकिंग नेटवर्क काफी व्यापक है। बिहार में कुल करीब 8304 बैंक शाखाएं हैं। इनमें लगभग 4000 शाखाएं ग्रामीण इलाकों में, 2300 अर्ध-शहरी क्षेत्रों में और करीब 1700 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। चार दिनों तक इन सभी शाखाओं में कामकाज ठप रहेगा। इसका सीधा असर आम लोगों, खासकर ग्रामीण ग्राहकों पर पड़ेगा, जो अभी भी नकद लेनदेन और शाखाओं पर निर्भर रहते हैं।
एटीएम सेवाएं भी हो सकती हैं प्रभावित
बैंक बंद रहने का असर केवल शाखाओं तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य में करीब 7052 एटीएम हैं, जिनमें इन चार दिनों के दौरान कैश लोडिंग नहीं हो पाएगी। अगर एटीएम में पहले से पर्याप्त नकदी नहीं डाली गई, तो लोगों को पैसे निकालने में भी दिक्कत हो सकती है। खासकर ग्रामीण और छोटे कस्बों में, जहां एटीएम की संख्या सीमित है, वहां नकदी संकट की स्थिति बन सकती है।
ऑनलाइन बैंकिंग अभी भी सीमित
हालांकि डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि बिहार में अभी भी 20 प्रतिशत से कम लोग ही ऑनलाइन बैंकिंग का नियमित उपयोग करते हैं। बड़ी आबादी आज भी बैंक शाखाओं पर जाकर ही अपने काम निपटाती है। ऐसे में लगातार चार दिन बैंक बंद रहने से पेंशन, सब्सिडी, नकद निकासी, चेक क्लीयरेंस और अन्य जरूरी सेवाएं प्रभावित होंगी।
यूनियनों का तर्क और सरकार से अपील
बैंक कर्मचारी यूनियन का कहना है कि उनकी मांग कोई नई नहीं है। वित्तीय क्षेत्र के अन्य संस्थानों जैसे नाबार्ड और एलआईसी में पहले से ही सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू है। यूनियन के अनुसार, बैंकों में भी यही मॉडल अपनाया जाना चाहिए। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस से जुड़े नौ संगठनों ने मिलकर इस हड़ताल का फैसला लिया है। यूनियन का दावा है कि उन्होंने सरकार को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पहले ही सूचित कर दिया है कि यदि मांगों पर विचार किया जाए तो हड़ताल टाली जा सकती है।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए
चार दिनों तक बैंक बंद रहने की स्थिति में ग्राहकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने जरूरी काम पहले ही निपटा लें। नकद निकासी, बिल भुगतान, चेक जमा, ड्राफ्ट, केवाईसी अपडेट जैसे काम 24 जनवरी से पहले कर लेना बेहतर होगा। जिन लोगों को एटीएम या ऑनलाइन बैंकिंग की सुविधा उपलब्ध है, वे उसका अधिकतम उपयोग करने की योजना बना सकते हैं, ताकि बैंक बंद रहने के दौरान परेशानी न हो।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग असर
ग्रामीण इलाकों में बैंक बंद रहने का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। यहां लोग फसलों की बिक्री, मजदूरी भुगतान, सरकारी योजनाओं की राशि और पेंशन के लिए बैंकों पर निर्भर रहते हैं। शहरी क्षेत्रों में डिजिटल विकल्प कुछ राहत दे सकते हैं, लेकिन वहां भी एटीएम में नकदी खत्म होने की आशंका बनी रहती है।
समय रहते सतर्कता जरूरी
24 से 27 जनवरी तक बैंक बंद रहने से बिहार में बैंकिंग सेवाओं पर व्यापक असर पड़ना तय है। यह स्थिति अस्थायी जरूर है, लेकिन अगर ग्राहक समय रहते सतर्क नहीं हुए तो उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इसलिए बेहतर यही है कि जरूरी वित्तीय काम जल्द से जल्द पूरे कर लिए जाएं और बैंक बंद रहने की अवधि के लिए पहले से तैयारी कर ली जाए।


