January 23, 2026

बिहार में 31 तक जमीन मापी के आवेदनों का होगा निपटारा, मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया से किया बड़ा ऐलान

  • सीएम नीतीश बोले- अविवादित और विवादित जमीनों का होगा निपटारा, जनता 25 जनवरी तक दे सुझाव

पटना। बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से चली आ रही परेशानियों को दूर करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि जमीन मापी से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का निपटारा 31 जनवरी 2026 तक कर दिया जाएगा। इसके लिए राज्यभर में एक विशेष भूमि मापी अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए कहा कि सरकार आम लोगों को जमीन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए विशेष अभियान
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में जमीन मापी के आवेदन लंबे समय से लंबित पड़े हैं। इनमें अविवादित और विवादित, दोनों तरह की जमीनों से जुड़े मामले शामिल हैं। इन सभी आवेदनों को तय समयसीमा के भीतर निपटाने के लिए 31 जनवरी 2026 तक विशेष भूमि मापी अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से अतिरिक्त संसाधन और कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि काम में किसी तरह की देरी न हो।
1 अप्रैल से नई व्यवस्था होगी लागू
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जमीन मापी की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व समयबद्ध बना दिया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अविवादित जमीन की मापी के लिए आवेदन शुल्क जमा होने के बाद अधिकतम 7 कार्य दिवस के भीतर मापी सुनिश्चित की जाएगी। वहीं विवादित जमीन के मामलों में शुल्क जमा होने के बाद अधिकतम 11 कार्य दिवस के भीतर जमीन की मापी की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अमीन की भूमिका और पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड
मुख्यमंत्री ने बताया कि जमीन की मापी पूरी होने के बाद अमीन द्वारा तैयार की गई मापी रिपोर्ट को समय पर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था के अनुसार, मापी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन की तिथि से 14वें दिन तक अमीन को मापी का प्रतिवेदन निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पर बड़ी जिम्मेदारी
इस अभियान को सफल बनाने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को खास जिम्मेदारी सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की ओर से आवश्यक संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता और पूरे अभियान की निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। उच्च स्तर पर पर्यवेक्षण रखा जाएगा, ताकि तय समयसीमा का सख्ती से पालन हो सके और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
जमीन विवादों में कमी लाने की कोशिश
बिहार में जमीन विवाद एक बड़ी सामाजिक और प्रशासनिक समस्या रही है। कई मामलों में जमीन की मापी समय पर न होने के कारण विवाद लंबे समय तक चलते रहते हैं। सरकार का मानना है कि यदि मापी की प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी, तो जमीन से जुड़े विवादों में काफी हद तक कमी आएगी। इससे न केवल लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि न्यायालयों पर भी मामलों का बोझ कम होगा।
जनता से मांगे गए सुझाव
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस नई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य की जनता से सुझाव भी मांगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रक्रिया को लेकर किसी के पास कोई उपयोगी या विशिष्ट सुझाव है, तो वे 25 जनवरी 2026 तक अपने सुझाव सरकार को भेज सकते हैं। सरकार इन सुझावों पर विचार कर व्यवस्था में आवश्यक सुधार कर सकती है। यह कदम प्रशासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डिजिटल और समयबद्ध प्रशासन की ओर कदम
इस घोषणा को डिजिटल और समयबद्ध प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जमीन मापी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया को तय समयसीमा में पूरा करना और उसे ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ना प्रशासनिक सुधार का अहम हिस्सा है। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी और लोगों को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी कि उनका आवेदन किस चरण में है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को लाभ
इस व्यवस्था का लाभ ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा। ग्रामीण इलाकों में खेती की जमीन से जुड़े विवाद आम हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में मकान, प्लॉट और निर्माण कार्यों के लिए जमीन मापी की जरूरत पड़ती है। समय पर मापी होने से विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।
सरकार की मंशा और आगे की राह
मुख्यमंत्री के इस ऐलान से साफ है कि सरकार जमीन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाना चाहती है। 31 जनवरी तक लंबित आवेदनों का निपटारा और 1 अप्रैल से नई समयबद्ध व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन मापी की प्रक्रिया कहीं अधिक सरल और भरोसेमंद हो जाएगी। यदि यह योजना जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो यह बिहार में भूमि प्रशासन सुधार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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