January 23, 2026

कांग्रेस ने बिहार के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया, पार्टी में टूट की खबर, 23 जनवरी को राहुल करेंगे मीटिंग

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर सियासी हलचल लगातार तेज बनी हुई है। महागठबंधन की हार के बाद जहां राजद और कांग्रेस के बीच बयानबाजी देखने को मिली, वहीं अब कांग्रेस पार्टी के अंदर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। बिहार कांग्रेस के विधायकों की लगातार बैठकों से दूरी, संगठनात्मक गतिविधियों में कम भागीदारी और दूसरी पार्टियों से संपर्क की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस आलाकमान ने बड़ा कदम उठाते हुए बिहार के सभी विधायकों को दिल्ली तलब किया है।
दिल्ली बुलाए गए सभी विधायक
मिली जानकारी के अनुसार बिहार कांग्रेस के सभी छह विधायकों को 23 जनवरी को दिल्ली बुलाया गया है। इस बैठक को पार्टी के भीतर चल रहे संकट प्रबंधन के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में पार्टी के चार विधायकों के टूटने की अटकलों ने नेतृत्व को सतर्क कर दिया है। इसी कारण राष्ट्रीय स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए सभी विधायकों को एक साथ दिल्ली बुलाने का फैसला लिया गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सभी विधायक इस बैठक में शामिल होते हैं या नहीं।
आलाकमान का सख्त रुख
सूत्रों के अनुसार अफवाहों और अंदरूनी असंतोष के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने इस बार सख्त रुख अपनाया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय सदाकत आश्रम में लगातार बुलाई जा रही बैठकों में कई विधायकों की गैरमौजूदगी को गंभीरता से लिया गया है। इसके बाद दिल्ली से सीधे हस्तक्षेप कर विधायकों को बुलाया गया है। इस पूरी कवायद को पार्टी नेतृत्व की ओर से संगठन को टूटने से बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राहुल गांधी करेंगे बातचीत
पार्टी सूत्रों का कहना है कि 23 जनवरी को दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में विधायकों से वन-टू-वन बातचीत की जाएगी। इस बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विशेष रूप से राहुल गांधी की भूमिका अहम मानी जा रही है। संभावना है कि विधायकों की नाराजगी, उनकी शिकायतें और भविष्य की अपेक्षाओं को सीधे सुना जाएगा। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे या अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात कराई जा सकती है।
नाराजगी की वजह समझने की कोशिश
बैठक का मुख्य उद्देश्य विधायकों की नाराजगी के कारणों को समझना बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जिन विधायकों के दूसरी पार्टियों के संपर्क में होने की चर्चा है, उनसे व्यक्तिगत बातचीत कर उन्हें पार्टी में बने रहने के लिए मनाने की कोशिश होगी। कांग्रेस नेतृत्व यह भी समझाने का प्रयास करेगा कि मौजूदा राजनीतिक हालात में पार्टी छोड़ने से उन्हें किस तरह के राजनीतिक जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है और कांग्रेस के भीतर उनके लिए क्या संभावनाएं मौजूद हैं।
संगठन में भूमिका बढ़ाने का संकेत
यह भी चर्चा है कि बातचीत के आधार पर कुछ विधायकों की संगठनात्मक भूमिका बढ़ाई जा सकती है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि चुनावी हार के बाद कई विधायक खुद को हाशिये पर महसूस कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें जिम्मेदारी देकर दोबारा सक्रिय करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इससे विधायकों में यह संदेश देने की कोशिश होगी कि पार्टी अब भी उन्हें महत्व देती है।
विधायक दल नेता का मुद्दा भी एजेंडे में
दिल्ली बैठक में एक बड़ा मुद्दा विधायक दल नेता के चयन का भी हो सकता है। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक बिहार कांग्रेस विधायक दल का नेता तय नहीं हो सका है। इस वजह से पार्टी को विधानसभा के भीतर कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। एक सत्र भी बिना विधायक दल नेता के ही निकल चुका है और अब बजट सत्र सामने है। सूत्रों का कहना है कि आलाकमान इस बैठक में सभी विधायकों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेगा। यदि सहमति नहीं बनती है तो वरिष्ठ नेताओं से परामर्श के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व अंतिम फैसला ले सकता है।
लगातार बैठकों से दूरी बनी चिंता
पिछले कुछ समय से कांग्रेस विधायकों की लगातार बैठकों से दूरी पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम की ओर से मनरेगा आंदोलन को लेकर बुलाई गई बैठक में चनपटिया के विधायक अभिषेक रंजन और वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा शामिल नहीं हुए थे। इसी तरह प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की बैठक में भी कुछ विधायकों की अनुपस्थिति दर्ज की गई। हालांकि पार्टी का आधिकारिक पक्ष यह रहा है कि अनुपस्थित विधायकों ने पहले से सूचना दी थी, लेकिन बार-बार ऐसी स्थिति बनने से सवाल जरूर खड़े हुए हैं।
महागठबंधन में भी असर
कांग्रेस के भीतर चल रही इस उठापटक का असर महागठबंधन की राजनीति पर भी पड़ सकता है। बिहार में कांग्रेस पहले ही सीमित संख्या में विधायकों के साथ विपक्ष में है। यदि इसमें भी टूट होती है तो विपक्ष की स्थिति और कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है।
आने वाले दिनों की दिशा तय करेगी बैठक
23 जनवरी को दिल्ली में होने वाली यह बैठक बिहार कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यह साफ हो जाएगा कि पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में कितनी सफल होती है और संगठनात्मक ढांचे को कैसे मजबूत किया जाता है। इस बैठक के नतीजों पर ही बिहार में कांग्रेस की आगे की राजनीतिक दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

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