January 23, 2026

लालू को भारत रत्न की मांग को लेकर पटना में लगा पोस्टर, तेज हुई सियासी सरगर्मी

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर भारत रत्न को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग पर अभी सियासी बहस थमी भी नहीं थी कि अब राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए भी इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग उठने लगी है। राजधानी पटना में राजद कार्यालय के बाहर लगे एक बड़े पोस्टर ने इस बहस को और हवा दे दी है।
भारत रत्न की मांग और पोस्टर की पृष्ठभूमि
राजद कार्यालय के बाहर लगाए गए इस पोस्टर में लालू प्रसाद यादव की तस्वीर के साथ संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर की तस्वीर भी लगाई गई है। बीच में भारत रत्न का चिन्ह दर्शाया गया है। पोस्टर के जरिए केंद्र सरकार से मांग की गई है कि सामाजिक न्याय के नेता और बिहार की आवाज रहे पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। यह पोस्टर राजद के सचिव रणजीत रजक द्वारा लगाया गया है। पोस्टर में लालू प्रसाद यादव को गरीबों का मसीहा और जननायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मांग केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक आधार पर भी रखी जा रही है।
राजद की राजनीति और सामाजिक न्याय का विमर्श
लालू प्रसाद यादव का नाम बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की राजनीति का पर्याय माना जाता है। मंडल राजनीति के दौर में उन्होंने पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। इसी विरासत के आधार पर उनके समर्थक उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं। राजद कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिस तरह अन्य नेताओं को उनके योगदान के लिए सम्मान मिला है, उसी तरह लालू प्रसाद यादव भी इस सम्मान के हकदार हैं। हालांकि पार्टी स्तर पर अभी इसे औपचारिक प्रस्ताव के रूप में नहीं रखा गया है, लेकिन पोस्टर के जरिए यह संदेश जरूर देने की कोशिश की गई है कि राजद का एक वर्ग इस मांग को गंभीरता से उठा रहा है।
कानूनी मामलों की छाया में उठी मांग
यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब लालू प्रसाद यादव कानूनी मुश्किलों से जूझ रहे हैं। लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद उनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। हाल ही में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई में इस मामले में केस चलाने की अनुमति दी गई। इस प्रकरण में लालू प्रसाद यादव के साथ-साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं। ऐसे में समर्थकों का मानना है कि भारत रत्न की मांग राजनीतिक और नैतिक समर्थन का प्रतीक भी है।
नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग से जुड़ा विवाद
लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह सम्मान देने की मांग चर्चा में थी। जनता दल यूनाइटेड के पूर्व सांसद और सलाहकार के सी त्यागी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की अपील की थी। इस पत्र के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई थी। हालांकि जदयू ने जल्द ही सफाई देते हुए कहा कि यह के सी त्यागी की व्यक्तिगत राय है और पार्टी की आधिकारिक मांग नहीं है।
सियासी प्रतिक्रियाएं और संभावित असर
भारत रत्न जैसे सम्मान को लेकर उठने वाली मांगें अक्सर राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बन जाती हैं। एक ओर नीतीश कुमार को लेकर चली बहस, दूसरी ओर अब लालू प्रसाद यादव के नाम पर पोस्टरबाजी, यह दिखाती है कि बिहार की राजनीति में प्रतीकों और सम्मानों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है। विपक्ष इसे राजनीतिक ड्रामा बता रहा है, जबकि समर्थक इसे अपने नेताओं के प्रति सम्मान और आस्था का प्रतीक मानते हैं। पटना में लगे इस पोस्टर ने साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति में भारत रत्न अब केवल सम्मान नहीं, बल्कि सियासी रणनीति और भावनात्मक अपील का विषय बन चुका है। लालू प्रसाद यादव को भारत रत्न देने की मांग चाहे औपचारिक रूप ले या न ले, लेकिन इसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मांग सिर्फ पोस्टर तक सीमित रहती है या किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप लेती है।

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