January 16, 2026

प्रदेश में राशन वितरण की नई व्यवस्था लागू: होंगे कहीं बदलाव, लोगों को मिलेगा लाभ

पटना। बिहार में राशन कार्डधारियों के लिए एक अहम बदलाव की घोषणा की गई है, जो सीधे तौर पर उनके दैनिक भोजन और पोषण से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले राशन के वितरण अनुपात में संशोधन किया है। इस बदलाव का मकसद गरीब और जरूरतमंद परिवारों को अधिक संतुलित और पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था जनवरी 2026 से पूरे राज्य में लागू की जाएगी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बदलाव
बिहार सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता प्राप्त गृहस्थी योजना के लाभुकों के लिए राशन वितरण का अनुपात बदल दिया है। अब तक गेहूं और चावल का अनुपात 1:4 था, जिसे अब 2:3 कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब राशन में गेहूं की मात्रा पहले से अधिक और चावल की मात्रा कुछ कम होगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से लाभुकों को अधिक संतुलित आहार मिलेगा।
अंत्योदय अन्न योजना के लाभुकों को क्या मिलेगा
अंत्योदय अन्न योजना के तहत आने वाले परिवारों को पहले की तरह प्रति परिवार 35 किलोग्राम राशन मिलता रहेगा, लेकिन अब इसके वितरण में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, इन परिवारों को 14 किलोग्राम गेहूं और 21 किलोग्राम चावल दिया जाएगा। पहले यही 35 किलोग्राम राशन 7 किलोग्राम गेहूं और 28 किलोग्राम चावल के रूप में मिलता था। इस बदलाव से साफ है कि गेहूं की मात्रा दोगुनी कर दी गई है, जबकि चावल की मात्रा घटाई गई है।
प्राथमिकता प्राप्त गृहस्थी योजना में नया अनुपात
प्राथमिकता प्राप्त गृहस्थी योजना के लाभुकों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम राशन मिलता है। नई व्यवस्था में इसमें 2 किलोग्राम गेहूं और 3 किलोग्राम चावल शामिल होंगे। इससे पहले प्रति व्यक्ति 1 किलोग्राम गेहूं और 4 किलोग्राम चावल दिया जाता था। यानी इस योजना के तहत भी गेहूं की मात्रा में बढ़ोतरी और चावल की मात्रा में कमी की गई है, ताकि भोजन में विविधता और पोषण संतुलन बेहतर हो सके।
केंद्र सरकार के निर्देश पर लिया गया फैसला
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार के सचिव ने बताया कि यह निर्णय भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के निर्देश के आधार पर लिया गया है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी राज्यों को राशन वितरण में सुधार और पोषण स्तर बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का सुझाव दिया था। इसी के तहत बिहार सरकार ने यह बदलाव लागू करने का फैसला किया है।
पोषण संतुलन पर पड़ेगा सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए 2:3 अनुपात से लाभुक परिवारों को पोषण के लिहाज से बड़ा फायदा होगा। गेहूं में अपेक्षाकृत अधिक फाइबर और प्रोटीन पाया जाता है, जबकि चावल मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। पुराने 1:4 अनुपात में चावल की अधिक मात्रा के कारण भोजन का संतुलन एकतरफा हो जाता था। अब गेहूं की बढ़ी हुई मात्रा से आहार अधिक संतुलित और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।
लाखों लाभुकों को मिलेगा लाभ
बिहार में लाखों परिवार अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता प्राप्त गृहस्थी योजना के तहत राशन प्राप्त करते हैं। यह बदलाव सीधे तौर पर इन परिवारों के दैनिक भोजन को प्रभावित करेगा। राज्य सरकार का कहना है कि राशन वितरण की प्रक्रिया में कोई अन्य बदलाव नहीं किया गया है। केवल गेहूं और चावल के अनुपात में संशोधन किया गया है, ताकि लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाला और संतुलित राशन मिल सके।
राशन वितरण प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने साफ किया है कि राशन वितरण की समय-सीमा, केंद्रों की व्यवस्था और लाभुकों की पात्रता में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सभी राशन कार्डधारी पहले की तरह अपने नजदीकी जन वितरण प्रणाली की दुकानों से राशन प्राप्त करेंगे। सचिव ने राशन कार्डधारियों से अपील की है कि वे अपने राशन वितरण केंद्र से नई व्यवस्था की जानकारी लें और समय पर राशन उठाव सुनिश्चित करें।
गरीब परिवारों के लिए राहत का कदम
राज्य सरकार का यह फैसला गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत लेकर आने वाला माना जा रहा है। बढ़ती महंगाई और पोषण संबंधी चुनौतियों के बीच यह बदलाव परिवारों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने में मदद करेगा। सरकार का कहना है कि भविष्य में भी राशन वितरण प्रणाली को और प्रभावी बनाने तथा लाभुकों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए ऐसे निर्णय लिए जाते रहेंगे।
आगे क्या करना होगा लाभुकों को
लाभुकों को सलाह दी गई है कि वे जनवरी 2026 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के अनुसार राशन प्राप्त करें। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है या निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जाता है, तो वे संबंधित अधिकारियों या विभागीय हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं। इस तरह, बिहार में राशन वितरण की यह नई व्यवस्था खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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