एसबीआई ने एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज में किया बदलाव: दूसरे एटीएम से कैश निकालना होगा महंगा, दरें लागू
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एटीएम से जुड़े शुल्कों में बदलाव कर दिया है। नई दरें अब लागू हो चुकी हैं और इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा, जो एसबीआई के बजाय अन्य बैंकों के एटीएम का अधिक इस्तेमाल करते हैं। खास तौर पर सेविंग्स और सैलरी अकाउंट धारकों को इस बदलाव के बाद अपने एटीएम ट्रांजेक्शन को लेकर ज्यादा सतर्क रहना होगा।
एटीएम चार्ज में बदलाव की वजह
एसबीआई के मुताबिक यह फैसला इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी के बाद लिया गया है। इंटरचेंज फीस वह राशि होती है, जो एक बैंक दूसरे बैंक के एटीएम इस्तेमाल करने पर चुकाता है। हाल के समय में इस लागत में इजाफा हुआ है, जिसके चलते बैंक ने एटीएम सर्विस चार्ज की समीक्षा की। फरवरी 2025 के बाद यह पहली बार है जब एसबीआई ने एटीएम ट्रांजेक्शन शुल्क में बदलाव किया है।
नए चार्ज क्या हैं
नई व्यवस्था के तहत अगर एसबीआई का कोई ग्राहक दूसरे बैंकों के एटीएम से तय फ्री लिमिट के बाद नकद निकासी करता है, तो अब उसे प्रति ट्रांजेक्शन 23 रुपये प्लस जीएसटी देना होगा। पहले यह शुल्क 21 रुपये प्लस जीएसटी था। यानी हर बार कैश निकालने पर दो रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट या पिन चेंज जैसे नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर अब 11 रुपये प्लस जीएसटी देना होगा, जबकि पहले यह शुल्क 10 रुपये प्लस जीएसटी था।
फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में क्या बदला और क्या नहीं
एसबीआई ने साफ किया है कि रेगुलर सेविंग्स अकाउंट धारकों के लिए दूसरे बैंकों के एटीएम पर मिलने वाली फ्री ट्रांजेक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे ग्राहक पहले की तरह हर महीने कुल 5 फ्री ट्रांजेक्शन कर सकेंगे। इसमें फाइनेंशियल यानी कैश विड्रॉल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजेक्शन शामिल होंगे। इस लिमिट के बाद ही नए बढ़े हुए चार्ज लागू होंगे। यानी सामान्य सेविंग्स अकाउंट धारकों के लिए यह बदलाव तभी असर डालेगा, जब वे तय सीमा से ज्यादा बार दूसरे बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करेंगे।
सैलरी अकाउंट धारकों के लिए बड़ा बदलाव
इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ा असर सैलरी पैकेज सेविंग्स अकाउंट रखने वाले ग्राहकों पर पड़ा है। पहले इन खाताधारकों को दूसरे बैंकों के एटीएम पर अनलिमिटेड फ्री ट्रांजेक्शन की सुविधा मिलती थी। अब इस सुविधा को सीमित कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार सैलरी अकाउंट धारक अब महीने में केवल 10 फ्री ट्रांजेक्शन ही दूसरे बैंकों के एटीएम से कर सकेंगे। फ्री लिमिट खत्म होने के बाद उन्हें भी वही शुल्क देना होगा, जो अन्य ग्राहकों को देना पड़ता है। यानी कैश निकालने पर 23 रुपये प्लस जीएसटी और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 11 रुपये प्लस जीएसटी।
किन ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
एसबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ खास श्रेणियों के खातों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं पड़ेगा। बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट यानी जनरल बेसिक खातों के चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके अलावा एसबीआई डेबिट कार्ड से एसबीआई के अपने एटीएम पर किए जाने वाले सभी ट्रांजेक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यानी अगर ग्राहक एसबीआई का ही एटीएम इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
कार्डलेस कैश विड्रॉल और किसान खातों को राहत
एसबीआई एटीएम से कार्डलेस कैश विड्रॉल की सुविधा पहले की तरह अनलिमिटेड और मुफ्त रहेगी। जिन ग्राहकों को मोबाइल या ओटीपी के जरिए बिना कार्ड के नकद निकालने की सुविधा मिलती है, उनके लिए कोई नया शुल्क नहीं जोड़ा गया है। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड खातों को भी इस बदलाव से बाहर रखा गया है। यानी कृषि से जुड़े खाताधारकों पर एटीएम चार्ज बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा।
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है
इस बदलाव के बाद ग्राहकों को अपने एटीएम इस्तेमाल की आदतों पर ध्यान देना होगा। जो लोग अक्सर दूसरे बैंकों के एटीएम से कैश निकालते हैं, उनके लिए यह खर्च थोड़ा बढ़ सकता है। खासकर सैलरी अकाउंट धारकों को अब यह ध्यान रखना होगा कि वे महीने में तय 10 फ्री ट्रांजेक्शन के भीतर ही रहें। वहीं जो ग्राहक एसबीआई के एटीएम का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह बदलाव लगभग बेअसर रहेगा, क्योंकि एसबीआई के अपने एटीएम पर ट्रांजेक्शन अब भी मुफ्त हैं।
डिजिटल विकल्पों की ओर संकेत
बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएम चार्ज में बढ़ोतरी का एक उद्देश्य ग्राहकों को डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग की ओर प्रोत्साहित करना भी है। यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसे विकल्पों के जरिए बैलेंस चेक, स्टेटमेंट और कई तरह के लेनदेन बिना किसी शुल्क के किए जा सकते हैं। एसबीआई द्वारा एटीएम ट्रांजेक्शन चार्ज में किया गया यह बदलाव आम बैंक ग्राहकों के लिए एक संकेत है कि भविष्य में नकद लेनदेन की लागत बढ़ सकती है। हालांकि बैंक ने यह भी सुनिश्चित किया है कि बुनियादी खातों, किसानों और एसबीआई के अपने एटीएम इस्तेमाल करने वालों पर इसका अतिरिक्त बोझ न पड़े। ऐसे में ग्राहकों के लिए बेहतर होगा कि वे अपने लेनदेन की योजना समझदारी से बनाएं और जहां संभव हो, डिजिटल बैंकिंग का ज्यादा उपयोग करें।


