पटना एयरपोर्ट पर महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने से गई जान, समय पर नहीं मिला इलाज, नहीं था मेडिकल स्टाफ
पटना। पटना एयरपोर्ट पर रविवार को घटी एक दर्दनाक घटना ने हवाई यात्रियों की सुरक्षा और एयरपोर्ट पर मौजूद बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने के बाद समय पर इलाज न मिल पाने के कारण उनकी मौत हो गई। यह मामला न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एक व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चिकित्सा व्यवस्था कितनी लचर हो सकती है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
यह घटना पटना एयरपोर्ट पर रविवार देर शाम की है। बेगूसराय जिले की रहने वाली 61 वर्षीय निर्मला देवी मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंची थीं। उन्हें स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या एसजी-337 से यात्रा करनी थी। उनकी बोर्डिंग का समय शाम 7 बजे तय था, लेकिन वे दोपहर करीब 3 बजे ही एयरपोर्ट पहुंच गई थीं। शुरुआती कुछ घंटों तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन शाम के समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
प्रस्थान क्षेत्र में बिगड़ी तबीयत
एयरपोर्ट के पहले तल पर स्थित प्रस्थान क्षेत्र में निर्मला देवी को अचानक बेचैनी महसूस होने लगी। देखते ही देखते उनकी हालत और बिगड़ गई और वे छटपटाने लगीं। आसपास मौजूद यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मियों ने मदद की कोशिश की, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि मौके पर कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस तरह की स्थिति ने सभी को हैरान कर दिया।
डॉक्टर की तलाश और अनाउंसमेंट
स्थिति गंभीर होती देख एयरपोर्ट प्रशासन की ओर से माइक पर अनाउंसमेंट कराया गया कि यदि कोई यात्री डॉक्टर हों तो तुरंत सहायता के लिए आगे आएं। यह अपने आप में व्यवस्था की गंभीर कमी को दर्शाता है। कुछ समय बाद संयोगवश यात्रा कर रहे एक डॉक्टर मदद के लिए आगे आए। उन्होंने महिला को प्राथमिक उपचार दिया और सीपीआर भी दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और महिला की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।
एम्बुलेंस पहुंचने में देरी
एयरपोर्ट निदेशक चंद्र प्रताप द्विवेदी के अनुसार, शाम करीब 4:40 बजे निर्मला देवी सीआईएसएफ के शिफ्ट-इन-चार्ज के केबिन के पास बेहोश हो गई थीं। इसके बाद एयरपोर्ट फायर सर्विस को सूचना दी गई और लगभग 4:50 बजे एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। यानी आपात स्थिति के बाद एम्बुलेंस आने में करीब 10 मिनट का समय लग गया, जो ऐसे मामलों में बेहद अहम होता है। इसके बाद महिला को राजाबाजार स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में मौत की पुष्टि
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने महिला का इलाज शुरू किया, लेकिन उनकी हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। शाम 5:13 बजे डॉक्टरों ने निर्मला देवी को मृत घोषित कर दिया। इस तरह एयरपोर्ट पर तबीयत बिगड़ने से लेकर अस्पताल में मौत की पुष्टि तक का पूरा घटनाक्रम महज डेढ़ घंटे के भीतर घटित हो गया, लेकिन इस दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा न मिलना सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया।
मेडिकल व्यवस्था की कमी स्वीकार
इस घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन को भी सफाई देनी पड़ी। एयरपोर्ट निदेशक ने स्वीकार किया कि उस समय पटना एयरपोर्ट पर कोई डॉक्टर या मेडिकल टीम तैनात नहीं थी। उन्होंने बताया कि पहले से चला आ रहा मेडिकल सेवा का करार समाप्त हो चुका था। नया करार मेदांता अस्पताल से किया गया है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से डॉक्टरों की तैनाती शुरू नहीं हो पाई थी। इसी वजह से एयरपोर्ट पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल
पटना एयरपोर्ट राज्य के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, जहां रोजाना हजारों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर, मेडिकल टीम और आपातकालीन सुविधाओं का न होना गंभीर लापरवाही मानी जा रही है। हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों में बुजुर्ग, बीमार और विशेष जरूरत वाले लोग भी शामिल होते हैं, जिनके लिए त्वरित चिकित्सा सुविधा जीवन और मृत्यु का सवाल बन सकती है।
प्रशासनिक दावे और जमीनी हकीकत
अक्सर एयरपोर्ट प्रबंधन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दावे करता है, लेकिन यह घटना उन दावों की पोल खोलती नजर आई। माइक से डॉक्टर खोजने का अनाउंसमेंट करना यह दर्शाता है कि आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। अगर समय पर प्रशिक्षित मेडिकल टीम मौजूद होती, तो शायद महिला की जान बचाई जा सकती थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
निर्मला देवी की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वे एक सामान्य यात्रा पर मुंबई जा रही थीं, लेकिन एयरपोर्ट पर ही उनकी जान चली गई। परिजनों के लिए यह सवाल बेहद पीड़ादायक है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता तो क्या उनकी जान बच सकती थी। पटना एयरपोर्ट पर महिला यात्री की मौत एक चेतावनी की तरह है। यह घटना दिखाती है कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की कमी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है। अब जरूरत है कि एयरपोर्ट प्रशासन इस घटना से सबक ले और जल्द से जल्द स्थायी मेडिकल व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी और यात्री को ऐसी कीमत न चुकानी पड़े।


