फरवरी के तीसरे सप्ताह से शुरू होगा बिहार विधानसभा का बजट सत्र, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा
पटना। फरवरी के तीसरे सप्ताह से बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने की संभावना ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों में नई हलचल पैदा कर दी है। विधानसभा चुनाव के बाद गठित नई सरकार अब पूरी तरह कामकाज में जुट गई है और आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय-व्यय का खाका तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यह बजट सत्र न केवल नई सरकार की प्राथमिकताओं को सामने लाएगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि आने वाले समय में राज्य की आर्थिक और विकासात्मक दिशा किस ओर बढ़ने वाली है।
नई सरकार और बजट सत्र की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में विधानसभा के बजट सत्र को फरवरी के तीसरे सप्ताह में बुलाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, सत्र की तिथियों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। बजट सत्र सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहला पूर्ण बजट सत्र होगा, जिसमें नई सरकार अपने विकास एजेंडे और नीतिगत प्राथमिकताओं को विधायी रूप से प्रस्तुत करेगी।
तीसरे अनुपूरक बजट की अहमियत
इस बजट सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तीसरा अनुपूरक बजट भी पेश किए जाने की संभावना है। इसके लिए सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। अनुपूरक बजट का उद्देश्य उन जरूरतों को पूरा करना होता है, जो मुख्य बजट में शामिल नहीं हो पातीं या जिनमें समय के साथ बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है। तीसरे अनुपूरक बजट में खासतौर पर योजनाओं के खर्च के पैटर्न में बदलाव पर जोर दिया जा रहा है।
योजनाओं के खर्च में संभावित बदलाव
सूत्रों के अनुसार, जिन योजनाओं में अब खर्च लाभकारी नहीं रह गया है या जिनमें अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं, उनके शेष बजट या उसके एक हिस्से को दूसरी जरूरतमंद योजनाओं में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग हो सके। ऐसे प्रस्तावों पर विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा है, ताकि बजट का बेहतर पुनर्विन्यास किया जा सके।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए प्रावधान
वित्त विभाग ने सभी विभागों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आवश्यक मैचिंग ग्रांट की व्यवस्था भी अनुपूरक बजट के जरिए की जाएगी। कई बार ऐसा होता है कि केंद्र सरकार की ओर से किसी योजना के तहत राशि जारी कर दी जाती है, लेकिन राज्य बजट में उसके खर्च का स्पष्ट प्रावधान नहीं होता। ऐसी स्थिति में तीसरे अनुपूरक बजट के माध्यम से उस राशि के उपयोग का रास्ता साफ किया जाएगा।
विभागों को सख्त समयसीमा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी विभागों को तीसरे अनुपूरक बजट के लिए अपने प्रस्ताव 19 जनवरी तक भेजने के निर्देश दिए गए हैं। विभागों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी प्रस्ताव की मंजूरी इस शर्त पर निर्भर करेगी कि उससे वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक न बढ़े। यह शर्त वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
पहले के अनुपूरक बजट की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक दो अनुपूरक बजट पेश किए जा चुके हैं। पहला अनुपूरक बजट 57,946 करोड़ रुपये का था, जबकि दूसरा अनुपूरक बजट 91,717 करोड़ रुपये का रहा। इन दोनों बजटों के जरिए सरकार ने कई अहम योजनाओं और जरूरतों के लिए अतिरिक्त प्रावधान किए थे। अब तीसरे अनुपूरक बजट को लेकर विभागीय स्तर पर तैयारी तेज हो गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार विकास कार्यों को लेकर सक्रिय बनी हुई है।
बजट सत्र का राजनीतिक और आर्थिक महत्व
बजट सत्र केवल आय-व्यय के आंकड़ों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सरकार की नीतियों, प्राथमिकताओं और राजनीतिक दिशा का भी प्रतिबिंब होता है। बिहार विधानसभा में होने वाला यह सत्र विपक्ष के लिए भी अहम होगा, क्योंकि इस दौरान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जाएंगे और विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। वहीं सरकार के लिए यह अवसर होगा कि वह अपने वादों और योजनाओं को सदन के पटल पर मजबूती से रखे।
आने वाले दिनों में क्या होगा खास
फिलहाल सबकी नजरें आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं, जिसमें बजट सत्र की तिथियां और एजेंडा स्पष्ट किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि फरवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाला यह सत्र राज्य की आर्थिक दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तीसरे अनुपूरक बजट और आगामी वित्तीय वर्ष के बजट के जरिए सरकार यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह वित्तीय अनुशासन के साथ विकास को प्राथमिकता दे रही है। बिहार विधानसभा का आगामी बजट सत्र न केवल नई सरकार की कार्यशैली और सोच को उजागर करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि आने वाले वर्षों में राज्य के विकास, कल्याण और आर्थिक संतुलन को किस तरह साधा जाएगा।


