पटना में राशन कार्ड की गहन जांच, 15 हजार से अधिक लाभुकों का कटेगा नाम
पटना। बिहार में जन वितरण प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार और प्रशासन लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी दिशा में पटना जिले में राशन कार्डधारियों की गहन जांच शुरू की गई है। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अनाज का लाभ केवल उन्हीं परिवारों तक पहुंचे, जो वास्तव में इसके पात्र हैं। प्रशासन का मानना है कि अपात्र लोगों द्वारा योजना का लाभ लेने से जरूरतमंद और गरीब परिवारों का हक प्रभावित होता है।
समीक्षा बैठक में लिया गया बड़ा फैसला
इस संबंध में पटना में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें आपूर्ति विभाग से जुड़े सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी ने की। बैठक में जन वितरण प्रणाली की वर्तमान स्थिति, राशन वितरण में आ रही समस्याओं और संभावित गड़बड़ियों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डाटाबेस मिलान से सामने आई गड़बड़ियां
अनुमंडल पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि विभिन्न सरकारी योजनाओं और उपलब्ध डाटाबेस के माध्यम से राशन कार्डधारियों के आंकड़ों का मिलान किया गया है। इस प्रक्रिया में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी सस्ते दर पर सरकारी राशन ले रहे हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुसार इसके पात्र नहीं हैं। प्रशासन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया है।
आय सीमा से अधिक कमाने वाले लाभुक
जांच के दौरान यह पाया गया कि पटना में करीब 5000 से अधिक ऐसे राशन कार्डधारी हैं, जिनकी वार्षिक आय राशन कार्ड के लिए तय की गई सीमा से अधिक है। इसके बावजूद वे लंबे समय से सरकारी राशन का लाभ उठा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आय सीमा पार करने के बाद भी राशन कार्ड बनाए रखना नियमों का उल्लंघन है और इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग होता है।
भूमिधारक और किसान योजना के लाभार्थी
इसके अलावा लगभग 9000 से अधिक ऐसे लाभुक चिन्हित किए गए हैं, जिनके पास कई एकड़ जमीन है और वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी ले रहे हैं। नियमों के अनुसार, इतनी अधिक भूमि और नियमित आय होने के बावजूद इनका जन वितरण प्रणाली से जुड़ा रहना सवालों के घेरे में है। प्रशासन ने इसे भी गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच के दायरे में रखा है।
चार पहिया वाहन और संपन्न परिवार
जांच में यह भी सामने आया कि 471 ऐसे राशन कार्डधारी हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन है। आमतौर पर चार पहिया वाहन रखने वाले परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम माना जाता है और वे राशन कार्ड के पात्र नहीं होते। इसके बावजूद वर्षों से इन परिवारों द्वारा सरकारी राशन उठाया जाना व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।
कंपनी डायरेक्टर और बड़े कारोबारी
सबसे हैरान करने वाले मामलों में 216 ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो किसी निजी कंपनी में डायरेक्टर या उच्च पद पर कार्यरत हैं। ये लोग नियमित और अच्छी आय के बावजूद राशन कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही 24 ऐसे व्यक्ति भी चिन्हित किए गए हैं, जिनका जीएसटी टर्नओवर 25 लाख रुपये से अधिक है। इतना बड़ा कारोबार होने के बावजूद सरकारी राशन योजना का लाभ लेना नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।
15 हजार से अधिक संदिग्ध राशन कार्ड
इन सभी श्रेणियों को मिलाकर अब तक पटना जिले में 15 हजार से अधिक राशन कार्डधारियों को संदिग्ध लाभुकों की सूची में रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह जांच प्रक्रिया अभी जारी है। सभी मामलों की गहन जांच के बाद जो भी लाभुक अपात्र पाए जाएंगे, उनके राशन कार्ड रद्द कर दिए जाएंगे।
राशन कार्ड रद्द और वसूली की तैयारी
अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि यदि जांच में यह साबित होता है कि अपात्र लोगों ने लंबे समय तक सरकारी अनाज का अनुचित लाभ उठाया है, तो उनसे अनाज की वसूली भी की जा सकती है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गलत तरीके से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का साहस न कर सके।
स्वेच्छा से कार्ड सरेंडर करने की अपील
प्रशासन ने अपात्र लाभुकों से अपील की है कि वे स्वयं आगे आकर अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दें। अधिकारियों ने कहा कि स्वेच्छा से कार्ड जमा करने वालों के प्रति नरमी बरती जा सकती है, लेकिन जांच में पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई तय है। इसके साथ ही सभी राशन कार्डधारियों को ई-केवाईसी कराने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। चेतावनी दी गई है कि ई-केवाईसी नहीं कराने वालों का राशन बंद किया जा सकता है।
जन वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने की कोशिश
प्रशासन की यह सख्ती बिहार में जन वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से अपात्र लोग सिस्टम से बाहर होंगे और वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को उनका हक मिलेगा। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग भी सुनिश्चित हो सकेगा।


