बिहार समेत चार राज्यों में ईडी की छापेमारी से हड़कंप, 15 से अधिक शहरों में हुई कार्रवाई
पटना। देशभर में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रवर्तन निदेशालय ने एक बड़े फर्जीवाड़े के खिलाफ एक साथ कई राज्यों में छापेमारी शुरू की। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे संगठित ठगी गिरोह को निशाना बनाते हुए ईडी ने बिहार समेत छह राज्यों के 15 से अधिक शहरों में एक साथ कार्रवाई की। सुबह-सुबह शुरू हुई इस छापेमारी से प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल तेज हो गई।
सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा
ईडी की जांच का केंद्र एक ऐसा संगठित गिरोह है, जो वर्षों से लोगों को सरकारी नौकरी का झांसा देकर ठग रहा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारतीय रेलवे समेत करीब 40 सरकारी विभागों में भर्ती के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र और कॉल लेटर जारी करता था। नौकरी की तलाश में भटक रहे युवाओं को भरोसे में लेकर उनसे लाखों रुपये की ठगी की जा रही थी। गिरोह की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि पहली नजर में दस्तावेज पूरी तरह असली लगते थे।
प्रतिष्ठित विभागों के नाम का दुरुपयोग
ईडी को जांच में पता चला है कि इस गिरोह ने रेलवे के अलावा डाक विभाग, वन विभाग, टैक्स डिपार्टमेंट, हाई कोर्ट, लोक निर्माण विभाग, बिहार सरकार, डीडीए और राजस्थान सचिवालय जैसे प्रतिष्ठित विभागों के नाम का भी दुरुपयोग किया। इन विभागों के नाम पर तैयार किए गए फर्जी नियुक्ति पत्रों और ईमेल के जरिए लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है। कई मामलों में पीड़ितों को ट्रेनिंग जॉइन करने की तारीख और पोस्टिंग स्थान तक बता दिया जाता था।
छह राज्यों में फैला नेटवर्क
ईडी की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात और केरल में एक साथ की जा रही है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के दो, इलाहाबाद के एक और लखनऊ के एक ठिकाने पर छापेमारी की गई है। बिहार में मुजफ्फरपुर के एक और मोतिहारी के दो ठिकानों पर ईडी की टीमें जांच में जुटी हुई हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गिरोह से जुड़े दो ठिकानों पर कार्रवाई चल रही है। वहीं तमिलनाडु के चेन्नै, गुजरात के राजकोट और केरल के चार शहरों में भी ईडी की छापेमारी जारी है।
फर्जी ईमेल और सैलरी ट्रांसफर का खेल
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने फर्जी ईमेल अकाउंट बनाकर लोगों को नियुक्ति पत्र भेजे। ये ईमेल एड्रेस इतने पेशेवर तरीके से तैयार किए गए थे कि देखने में वे असली सरकारी विभागों के आधिकारिक मेल जैसे लगते थे। लोगों का भरोसा और मजबूत करने के लिए गिरोह ने कुछ पीड़ितों के बैंक खातों में दो से तीन महीने तक सैलरी के नाम पर पैसे भी ट्रांसफर किए। इससे पीड़ितों को यह भरोसा हो गया कि नौकरी वास्तव में लग चुकी है। इसके बाद उनसे प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी मनी या अन्य बहानों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
रेलवे की भर्तियों पर खास फोकस
ईडी सूत्रों के अनुसार यह गिरोह खासतौर पर आरपीएफ, टीटीई और रेलवे टेक्नीशियन जैसे पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देता था। रेलवे को देश की सबसे बड़ी नियोक्ता संस्थाओं में से एक माना जाता है और यहां भर्ती की उम्मीद में लाखों युवा रहते हैं। इसी उम्मीद का फायदा उठाकर गिरोह ने बड़ी संख्या में युवाओं को अपने जाल में फंसाया। फर्जी कॉल लेटर और नियुक्ति पत्रों पर रेलवे के नाम और प्रतीकों का इस्तेमाल कर ठगी को अंजाम दिया गया।
मनी ट्रेल और डिजिटल सबूतों की जांच
ईडी की कार्रवाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है। एजेंसी अब मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, ईमेल सर्वर और मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी से जुटाई गई रकम कहां-कहां भेजी गई, किन खातों में जमा हुई और किन लोगों ने इस नेटवर्क को संचालित किया। कई ठिकानों से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े सबूत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पीड़ितों की संख्या का आकलन
हालांकि अभी तक ठगी के कुल शिकार लोगों की संख्या सामने नहीं आई है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क को देखते हुए माना जा रहा है कि सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों लोग इस गिरोह का शिकार बने होंगे। ईडी अब राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर पीड़ितों की पहचान और शिकायतों का रिकॉर्ड जुटाने में भी लगी है।
आगे और खुलासों की संभावना
ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। गिरोह से जुड़े कुछ और ठिकानों पर भी जल्द कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही, जिन लोगों ने इस नेटवर्क को तकनीकी या प्रशासनिक मदद दी, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
युवाओं के लिए चेतावनी
इस मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े कितने संगठित और खतरनाक हो सकते हैं। जांच एजेंसियां युवाओं से अपील कर रही हैं कि वे किसी भी नौकरी प्रस्ताव की सच्चाई आधिकारिक वेबसाइट और नोटिफिकेशन से जरूर जांचें और किसी भी संदिग्ध कॉल या ईमेल से सतर्क रहें।


