February 24, 2026

बिहार में जल्द महंगी होगी बिजली, अप्रैल से दाम बढ़ाने की तैयारी, दो नए प्रस्ताव तैयार

पटना। नए साल की शुरुआत के साथ ही बिहार में बिजली की दरों को लेकर सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज होती दिख रही है। चर्चा है कि यदि प्रस्तावित योजनाओं पर मुहर लग जाती है तो 1 अप्रैल 2026 से राज्य के उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला केवल बिजली के बिल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम जनता, छोटे दुकानदारों और सरकार के बीच एक बड़ी बहस का रूप लेता जा रहा है। बिजली की कीमतें सीधे तौर पर घरेलू बजट और कारोबार की लागत से जुड़ी होती हैं, इसलिए इस संभावित बढ़ोतरी को लेकर लोगों में चिंता स्वाभाविक है।
आयोग के सामने रखे गए दो अहम प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी, स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर और बिहार ग्रिड कंपनी ने अपने-अपने प्रस्ताव बिहार विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष पेश किए हैं। इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से बिजली की दरों में 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही छोटे दुकानदारों को कुछ राहत देने के उद्देश्य से उनके फिक्स चार्ज में 50 रुपये की कमी का भी प्रस्ताव रखा गया है। इन दोनों बिंदुओं को लेकर ही सबसे ज्यादा चर्चा और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
जनसुनवाई को माना जा रहा सियासी कसौटी
इन प्रस्तावों पर फैसला लेने से पहले आयोग की ओर से जनसुनवाई आयोजित की जा रही है। आज पटना में होने वाली सुनवाई को सत्ता के गलियारों में पॉलिटिकल लिटमस टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यहां उठने वाली आपत्तियां और सुझाव आने वाले फैसले की दिशा तय करेंगे। अगर कोई नागरिक आज की सुनवाई में शामिल नहीं हो पाता है तो उसके पास आगे भी मौके रहेंगे। 15 जनवरी को बेगूसराय, 19 जनवरी को गया और 5 फरवरी को पटना के विद्युत भवन स्थित आयोग के कोर्ट रूम में अगली सुनवाइयां प्रस्तावित हैं।
आयोग की मंशा और प्रक्रिया
बिहार विद्युत विनियामक आयोग का कहना है कि वह किसी भी निर्णय से पहले सभी वर्गों की बात सुनना चाहता है। आयोग की कोशिश है कि घरेलू उपभोक्ताओं, व्यापारियों, उद्योगपतियों और सामाजिक संगठनों की दलीलों को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लिया जाए। इससे बाद में फैसले पर जनविरोधी होने का आरोप न लगे और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
ग्रामीण उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है। प्रस्तावों के अनुसार इस व्यवस्था में तत्काल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, लेकिन 125 यूनिट से अधिक खपत होने पर प्रति यूनिट 35 पैसे अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। इसका मतलब यह है कि जिन परिवारों की खपत इस सीमा से ऊपर जाती है, उनके मासिक बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। ग्रामीण इलाकों में पहले से ही आय सीमित होने के कारण इस संभावित बोझ को लेकर चिंता जताई जा रही है।
छोटे दुकानदारों की बढ़ी परेशानी
बिजली दरों में प्रस्तावित बदलाव का असर छोटे दुकानदारों पर भी पड़ सकता है। 100 यूनिट से कम बिजली खर्च करने वाले शहरी और ग्रामीण दुकानदारों के लिए भी दरों में बढ़ोतरी की आशंका है। व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए एक नया स्लैब तय कर 8.14 रुपये प्रति यूनिट रखने का प्रस्ताव रखा गया है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और लागत के बीच बिजली का यह अतिरिक्त बोझ उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
राहत वाला दूसरा पहलू
हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आया है। साउथ और नॉर्थ बिहार डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने शहरी इलाकों में लागू दो अलग-अलग स्लैब को एक करने का प्रस्ताव आयोग के सामने रखा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो शहरी उपभोक्ताओं के लिए 7.77 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू हो सकती है। इसके साथ ही 125 यूनिट फ्री बिजली के बाद प्रति यूनिट 1.18 रुपये तक की राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसे सरकार की ओर से शहरी मध्यम वर्ग और वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
अंतिम फैसले की समयसीमा
आयोग के कोर्ट रूम में होने वाली सुनवाइयों के दौरान अध्यक्ष आमिर सुबहानी समेत अन्य अधिकारी आम जनता, बिजली कंपनियों और विभिन्न संगठनों की दलीलें सुनेंगे। इसके बाद सभी तथ्यों, आपत्तियों और प्रस्तावों की समीक्षा कर अंतिम फैसला लिया जाएगा। यह फैसला 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा।
जनता बनाम महंगाई की बहस
बिजली दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर राज्य में अवाम बनाम सिस्टम की बहस तेज होती जा रही है। एक ओर बिजली कंपनियां अपने खर्च और व्यवस्था सुधार का हवाला दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोग इसे महंगाई की आग में एक और चिंगारी मान रहे हैं। जनसुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो जाएगा कि जनता किस हद तक इस बढ़ोतरी को स्वीकार करने के लिए तैयार है। बिहार में बिजली दरों को लेकर आने वाला समय काफी अहम माना जा रहा है। आयोग के सामने रखे गए प्रस्ताव अगर मंजूर होते हैं तो अप्रैल 2026 से बिजली का खर्च बढ़ सकता है, वहीं कुछ वर्गों को आंशिक राहत भी मिल सकती है। अब सबकी निगाहें आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह कदम जनता के हित में संतुलित साबित होता है या महंगाई के बोझ को और बढ़ा देता है।

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