February 23, 2026

महाराष्ट्र में ओवैसी की चुनावी सभा में भगदड़, पुलिस का लाठीचार्ज, जबरदस्त हुआ हंगामा

अकोला। महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। सभी प्रमुख दल अपनी ताकत दिखाने और मतदाताओं को साधने के लिए जनसभाओं और रैलियों का सहारा ले रहे हैं। इसी क्रम में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की एक चुनावी सभा महाराष्ट्र के अकोला में आयोजित की गई। यह सभा चुनावी दृष्टि से अहम मानी जा रही थी, लेकिन सभा के दौरान हालात ऐसे बिगड़े कि पुलिस को स्थिति संभालने के लिए लाठीचार्ज तक करना पड़ा।
जुल्फिकार अली मैदान में आयोजित हुई सभा
अकोला के गढ़ इलाके स्थित जुल्फिकार अली मैदान में यह चुनावी जनसभा आयोजित की गई थी। बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय लोग सभा में शामिल होने पहुंचे थे। आयोजन को लेकर उत्साह इतना अधिक था कि मैदान और उसके आसपास भीड़ लगातार बढ़ती चली गई। शुरुआत में कार्यक्रम सामान्य ढंग से चल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे सभा अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ी, हालात तनावपूर्ण होने लगे।
भीड़ के अनियंत्रित होने से बिगड़े हालात
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, सभा में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण लोग मंच के काफी नजदीक तक पहुंच गए। सभा समाप्त होने के समय अचानक बड़ी संख्या में लोग मंच की ओर बढ़ने लगे। बताया जा रहा है कि ओवैसी से मिलने और नजदीक से देखने की होड़ में लोग आगे की ओर दौड़ पड़े, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई।
भगदड़ जैसी स्थिति और अफरा-तफरी
लोगों के एक साथ मंच की ओर बढ़ने से सभा स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई लोग एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते नजर आए। कुछ समय के लिए ऐसा माहौल बन गया, जिसमें कुचलने जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इस अफरा-तफरी के कारण कार्यक्रम स्थल पर चीख-पुकार मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। मौके पर मौजूद स्वयंसेवक और आयोजक भीड़ को संभालने में असफल नजर आए।
पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप
हालात बिगड़ते देख मौके पर तैनात पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भीड़ को पीछे हटाने और मंच के पास स्थिति सामान्य करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम केवल भीड़ को नियंत्रित करने और किसी बड़े हादसे को टालने के लिए उठाया गया। लाठीचार्ज के बाद धीरे-धीरे भीड़ पीछे हटी और स्थिति पर काबू पाया जा सका।
समर्थकों के बीच झड़प के दृश्य
घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि सभा के दौरान कुछ समर्थक आपस में ही भिड़ गए थे। भीड़ के दबाव और अव्यवस्था के कारण कई जगहों पर धक्का-मुक्की हुई, जो झड़प में बदल गई। इन वीडियो ने घटना को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि स्थिति को समय रहते काबू में कर लिया गया, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
आयोजकों की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सभा के आयोजकों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि इतनी बड़ी सभा के लिए पर्याप्त योजना और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई थी। मंच, प्रवेश और निकास के रास्तों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण भीड़ अनियंत्रित हो गई। प्रशासनिक स्तर पर भी इस बात की समीक्षा की जा रही है कि सुरक्षा इंतजामों में कहां चूक हुई।
ओवैसी के आह्वान को लेकर विवाद
कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि सभा के अंतिम समय में ओवैसी के कथित आह्वान के बाद लोग मंच की ओर तेजी से बढ़े, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। हालांकि इस पर आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। एआईएमआईएम की ओर से भी इस मामले में अब तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पार्टी समर्थकों का कहना है कि भीड़ का उत्साह अचानक बढ़ गया था, जिसे संभालना मुश्किल हो गया।
चुनावी राजनीति पर असर
इस घटना का असर अकोला ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति पर भी पड़ता दिख रहा है। विपक्षी दलों ने इसे प्रशासनिक विफलता और सत्ताधारी दल पर सवाल उठाने के लिए मुद्दा बना लिया है। वहीं, एआईएमआईएम समर्थकों का कहना है कि इतनी बड़ी भीड़ का जुटना पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है, लेकिन अव्यवस्था ने कार्यक्रम को विवादों में ला दिया।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर यह देखा जा रहा है कि भगदड़ और झड़प की असल वजह क्या थी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अकोला में हुई यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि चुनावी सभाओं में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है। एक ओर राजनीतिक दल अपनी ताकत दिखाने के लिए बड़ी सभाएं कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था के कारण ऐसे कार्यक्रम कभी-कभी खतरनाक मोड़ ले लेते हैं। ओवैसी की सभा में हुई भगदड़ और लाठीचार्ज की घटना से यह साफ है कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों के लिए प्रशासन और राजनीतिक दलों दोनों को अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी दिखानी होगी।

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