January 7, 2026

सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, कहा- न्याय के साथ विकास हमारी प्राथमिकता, सात निश्चय तीन पर रहेगा जोर

  • मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट, सरकार की योजनाओं की दी जानकारी, लोगों से मांगे सुझाव

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए विकास और सामाजिक न्याय के एजेंडे को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है। उन्होंने आज सुबह सोशल मीडिया के माध्यम से एक विस्तृत संदेश साझा किया, जिसमें सरकार की अब तक की उपलब्धियों के साथ-साथ आने वाले वर्षों की योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी दी गई। इस पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री ने न केवल अपनी नीतियों को जनता के सामने रखा, बल्कि लोगों से सुझाव भी मांगे, ताकि योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
न्याय के साथ विकास का मूल मंत्र
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने संदेश में कहा कि 24 नवंबर 2005 को राज्य में सरकार बनने के बाद से ही उनकी सरकार “न्याय के साथ विकास” के सिद्धांत पर लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि विकास तभी सार्थक हो सकता है, जब वह समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। इसी सोच के साथ सरकार ने बिहार को एक परिवार की तरह मानते हुए सभी वर्गों के सम्मान और अधिकारों का ध्यान रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की कोशिश हमेशा से यह रही है कि किसी भी वर्ग को उपेक्षित या हाशिए पर महसूस न करना पड़े।
सात निश्चय-3 और भविष्य की दिशा
नीतीश कुमार ने बताया कि बिहार को वर्ष 2025 से 2030 के बीच देश के सबसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लक्ष्य के साथ ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम को लागू किया गया है। यह कार्यक्रम राज्य के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक विकास को नई दिशा देने के लिए तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन सात निश्चयों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी ढांचे और जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।
सबका सम्मान–जीवन आसान की अवधारणा
सात निश्चय-3 के अंतर्गत सातवां निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ रखा गया है, जिसे मुख्यमंत्री ने खास तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस निश्चय का उद्देश्य आम नागरिकों के जीवन में मौजूद कठिनाइयों को कम करना है। इसके तहत सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और सम्मान के साथ उन्हें सुविधाएं मिल सकें।
वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ निश्चय के तहत सबसे पहले राज्य के वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उनका कहना है कि बुजुर्गों को अक्सर बीमारी या आपात स्थिति में अस्पतालों और जांच केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जो उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी कष्टदायक होता है। सरकार की कोशिश है कि ऐसी परिस्थितियों में वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम सुविधाएं उनके घर पर ही उपलब्ध कराई जाएं।
घर बैठे स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना
नीतीश कुमार ने विस्तार से बताया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग को तेजी से काम करने का निर्देश दिया गया है। इस योजना के तहत नर्सिंग सहायता, घर पर पैथोलॉजी जांच, ब्लड प्रेशर और ईसीजी जांच, फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में आवश्यक चिकित्सकीय सहायता भी घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे बुजुर्गों को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि उनका आत्मसम्मान भी बना रहेगा।
स्वास्थ्य से आगे की सोच
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए केवल स्वास्थ्य सेवाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा और भी कई ऐसी सुविधाएं हो सकती हैं, जो उनके दैनिक जीवन को सरल बना सकें। उन्होंने प्रशासन और समाज दोनों से इस दिशा में गंभीरता से सोचने की अपील की। उनका कहना है कि बुजुर्गों के अनुभव और जरूरतों को समझकर ही उनके लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा सकती हैं।
जनता से सुझाव की अपील
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में आम लोगों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि यदि किसी नागरिक के पास वरिष्ठ नागरिकों या आम जनता के जीवन को आसान बनाने से जुड़े कोई व्यावहारिक और उपयोगी सुझाव हों, तो वे सरकार तक अवश्य पहुंचाएं। इसके लिए उन्होंने एक क्यूआर कोड भी जारी किया है, जिसे स्कैन कर लोग अपने सुझाव सीधे मुख्यमंत्री तक भेज सकते हैं। उनका मानना है कि जनता की भागीदारी से योजनाएं और अधिक प्रभावशाली बन सकती हैं।
सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री का यह संदेश इस बात की ओर संकेत करता है कि सरकार विकास को केवल योजनाओं और आंकड़ों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव के रूप में देखना चाहती है। ‘न्याय के साथ विकास’ और ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ जैसे विचार इसी सोच का विस्तार हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन नीतियों और योजनाओं का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और किस तरह बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाता है।

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