January 7, 2026

लालू यादव की संपत्ति की होगी जांच, विजय सिन्हा बोले- बिहार में अब नहीं बचेगा कोई अपराधी और भू-माफिया

पटना। बिहार की राजनीति एक बार फिर जमीन, संपत्ति और माफिया के मुद्दे को लेकर गरमा गई है। सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड ने सरकार से यह सवाल उठाया है कि जब राज्य में भू-माफिया के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है, तो राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जमीन और संपत्तियों की भी जांच कराई जानी चाहिए या नहीं। जेडीयू की इस मांग ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है और इसे सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
जेडीयू की मांग और राजनीतिक संकेत
जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने डिप्टी मुख्यमंत्री से यह मांग की कि सरकार समानता के सिद्धांत पर काम करे। उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार भू-माफिया और अवैध जमीन कारोबारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है, तो जांच का दायरा किसी एक वर्ग या व्यक्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए। जेडीयू का तर्क है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, चाहे वह आम व्यक्ति हो या बड़ा राजनीतिक नेता।
विजय कुमार सिन्हा का सख्त रुख
जेडीयू की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के डिप्टी सीएम और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ संकेत दिया कि राज्य में भू-माफिया के खिलाफ अभियान बिना रुके जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि बिहार में अब न तो अपराधियों को संरक्षण मिलेगा और न ही जमीन माफिया को। विजय सिन्हा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ जनसंवाद कार्यक्रम में आवेदन मिलता है, तो विभाग और सरकार उस पर नियमानुसार विचार करेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सक्रियता
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद विजय कुमार सिन्हा लगातार सख्त फैसले ले रहे हैं। उनके नेतृत्व में विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई शुरू की है। अवैध कब्जे, फर्जी दस्तावेज और दलालों के नेटवर्क पर नजर रखी जा रही है। इस सक्रियता के चलते भू-माफिया के साथ-साथ उन अधिकारियों में भी खौफ का माहौल है, जो पहले ऐसे मामलों में लापरवाही या मिलीभगत के आरोप झेलते रहे हैं।
जनसंवाद कार्यक्रम और त्वरित समाधान
विजय सिन्हा हर सप्ताह जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन कर आम लोगों की जमीन से जुड़ी समस्याएं सुन रहे हैं। इन कार्यक्रमों में लोग सीधे अपनी शिकायतें रखते हैं और कई मामलों में मौके पर ही समाधान भी किया जा रहा है। इस प्रक्रिया ने आम जनता के बीच सरकार की छवि को मजबूत किया है। साथ ही, जिन मामलों में अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है, वहां उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
अधिकारियों में असंतोष और दबाव की राजनीति
डिप्टी सीएम की सख्ती से विभाग के कुछ अधिकारियों में असंतोष भी देखा जा रहा है। खबर है कि कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। हालांकि विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
लालू यादव की जमीन जांच का सवाल
जेडीयू की ओर से उठाई गई मांग के बाद यह सवाल केंद्र में आ गया है कि क्या आरजेडी प्रमुख की संपत्तियों की भी जांच होगी। इस मुद्दे को विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल राजनीतिक बदले की भावना से जोड़कर देख सकता है, जबकि जेडीयू इसे कानून का समान रूप से पालन करने का विषय बता रहा है। इस बहस ने बिहार की राजनीति में जमीन और संपत्ति से जुड़े पुराने विवादों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
भू-माफिया के खिलाफ सरकार की मंशा
विजय सिन्हा ने यह दोहराया कि बिहार में भू-माफिया, जमीन के दलाल और उनसे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अभियान पूरी मजबूती से जारी रहेगा। उनका दावा है कि राज्य में अब ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां अवैध तरीके से जमीन हथियाने वालों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी। सरकार की कोशिश है कि आम लोगों को उनकी जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा मिले और न्याय की प्रक्रिया तेज हो।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक और सामाजिक असर भी पड़ सकता है। एक ओर जहां सरकार सख्ती के जरिए अपनी छवि मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में पेश कर सकता है। जमीन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कार्रवाई का सीधा असर ग्रामीण समाज और शहरी विस्तार से जुड़े वर्गों पर पड़ता है। लालू प्रसाद यादव की जमीनों की जांच की मांग ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा का सख्त रुख यह संकेत देता है कि सरकार भू-माफिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ पीछे हटने के मूड में नहीं है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस अभियान का दायरा कितना व्यापक होता है और इसका राजनीतिक संतुलन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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