January 7, 2026

पटना में डॉक्टरों को पर्ची पर दवा का शुद्ध नाम लिखना अनिवार्य, राज्य सरकार का निर्देश जारी

पटना। मरीजों को सही, सस्ती और सुरक्षित दवा उपलब्ध कराने की दिशा में नेशनल मेडिकल कमिशन ने एक अहम फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब पटना समेत पूरे बिहार के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों को मरीजों के पर्चे पर दवा का नाम शुद्ध, स्पष्ट और कैपिटल अक्षरों में लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि इसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जा सके।
आदेश का उद्देश्य और इसकी पृष्ठभूमि
नेशनल मेडिकल कमिशन का यह आदेश मरीजों को होने वाली दवा संबंधी परेशानियों को ध्यान में रखकर जारी किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि डॉक्टरों की लिखावट अस्पष्ट होने के कारण फार्मासिस्ट को दवा पढ़ने में दिक्कत होती है। इससे कभी-कभी गलत दवा या गलत डोज दिए जाने की आशंका भी बनी रहती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए एनएमसी ने साफ और कैपिटल अक्षरों में दवा का नाम लिखने का निर्देश दिया है। साथ ही, इस आदेश का एक बड़ा उद्देश्य मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के बजाय जेनेरिक दवाओं की ओर बढ़ावा देना भी है, ताकि इलाज का खर्च कम हो सके और आम लोगों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
जेनेरिक दवाओं को लेकर सख्ती
एनएमसी के निर्देश के अनुसार अब डॉक्टर केवल जेनेरिक दवाओं का ही नाम पर्चे पर लिखेंगे। किसी भी ब्रांडेड दवा का नाम लिखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर द्वारा ब्रांडेड दवा लिखे जाने की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जेनेरिक दवाएं वही दवाएं होती हैं, जिनमें वही तत्व होते हैं जो ब्रांडेड दवाओं में होते हैं, लेकिन इनकी कीमत काफी कम होती है। इससे मरीजों को सस्ती दर पर प्रभावी इलाज मिल सकता है।
कहां-कहां लागू होगा यह आदेश
यह निर्देश पटना एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच, आईजीआईएमएस समेत बिहार के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में तुरंत लागू होगा। इसके अलावा राज्य सरकार की योजना है कि जल्द ही जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी इस आदेश को लागू किया जाए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों को इस आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
लिखावट को लेकर भी सख्त निर्देश
एनएमसी ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि डॉक्टरों की लिखावट साफ और पढ़ने योग्य होनी चाहिए। पर्चे पर दवा का नाम इस तरह लिखा जाए कि फार्मासिस्ट या अन्य स्वास्थ्य कर्मी को उसे समझने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। आड़ी-तिरछी, अधूरी या अस्पष्ट लिखावट को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए डॉक्टरों को जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षण देने या उन्हें लिखावट सुधारने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। यदि किसी डॉक्टर की लिखावट बार-बार अस्पष्ट पाई जाती है, तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
मरीजों को क्या होगा फायदा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से मरीजों को कई स्तरों पर लाभ होगा। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दवा की पहचान में होने वाली गलती की संभावना कम हो जाएगी। फार्मासिस्ट आसानी से दवा का नाम पढ़ सकेंगे और सही दवा सही मात्रा में मरीज को दे सकेंगे। इसके अलावा जेनेरिक दवाओं के उपयोग से इलाज का खर्च भी काफी हद तक कम होगा। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को राहत मिलेगी, जो महंगी ब्रांडेड दवाओं के कारण इलाज बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी
इस आदेश के तहत केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि फार्मासिस्ट और अस्पताल के अन्य स्वास्थ्य कर्मी भी जिम्मेदार होंगे। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्चे में लिखी गई दवा को सही तरीके से समझकर मरीज को दी जाए। यदि किसी स्तर पर दवा वितरण में गलती होती है, तो उसकी जांच की जाएगी और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। सरकार का मानना है कि डॉक्टर, फार्मासिस्ट और स्वास्थ्य कर्मियों के आपसी समन्वय से ही इस व्यवस्था को सफल बनाया जा सकता है।
स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता की ओर कदम
नेशनल मेडिकल कमिशन का यह फैसला स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे दवा वितरण की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी। मरीज को यह भी स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि उसे कौन सी दवा दी जा रही है और उसका असली नाम क्या है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में यह आदेश न केवल मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि डॉक्टरों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा। साथ ही, जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा मिलने से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक किफायती और समावेशी बन सकेगी।
भविष्य में व्यापक असर की उम्मीद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में इस आदेश के सफल क्रियान्वयन के बाद अन्य राज्यों में भी इसे और सख्ती से लागू किया जाएगा। आने वाले समय में यह कदम पूरे देश में दवा लिखने और वितरण की प्रणाली में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इस तरह, पटना समेत पूरे बिहार में डॉक्टरों को पर्चे पर दवा का शुद्ध और जेनेरिक नाम कैपिटल अक्षरों में लिखने का यह निर्देश मरीजों के हित में उठाया गया एक अहम और दूरगामी कदम माना जा रहा है।

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