January 7, 2026

प्रदेश में 10 जनवरी तक पूरी होगी शिक्षकों की ट्रांसफर पोस्टिंग, नहीं स्कूलों का जल्द होगा आवंटन

पटना। बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अंतर जिला स्थानांतरण और नई पोस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म होने की ओर है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी स्कूल आवंटन की प्रक्रिया 10 जनवरी तक हर हाल में पूरी कर ली जाएगी। राज्य के अधिकांश जिलों में यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कई जगहों पर इसे अंतिम रूप भी दिया जा रहा है। इससे हजारों शिक्षकों को जल्द ही अपने नए कार्यस्थल का पता चल जाएगा।
प्रखंड आवंटन के बाद स्कूल आवंटन की शुरुआत
शिक्षा विभाग के अनुसार, 31 दिसंबर तक नालंदा जिले को छोड़कर राज्य के लगभग सभी जिलों में स्थानांतरित शिक्षकों को प्रखंड आवंटित कर दिया गया था। इसके बाद 1 जनवरी से स्कूल आवंटन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। कटिहार, सुपौल, किशनगंज जैसे जिलों में गुरुवार से ही शिक्षकों को उनके प्रखंड के भीतर स्कूल आवंटित किए जाने लगे हैं। अब यही प्रक्रिया शेष जिलों में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।
ई-शिक्षकोष पोर्टल के जरिए ऑनलाइन प्रक्रिया
स्कूल आवंटन की पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षकोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जा रही है। शिक्षा विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवंटन होने से पारदर्शिता बनी रहती है और मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश कम हो जाती है। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होती है, बल्कि अनियमितताओं और शिकायतों की संभावना भी घटती है। शिक्षक अपने लॉगिन के माध्यम से आवंटन से जुड़ी जानकारी देख पा रहे हैं, जिससे उन्हें स्थिति को लेकर स्पष्टता मिल रही है।
पहले तय समय-सीमा में क्यों हुई देरी
गौरतलब है कि पहले स्कूल आवंटन की समय-सीमा 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक तय की गई थी, लेकिन कई प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। कई जिलों में रिक्त पदों की सही संख्या का मिलान, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों की वास्तविक जरूरत का आकलन करने में अपेक्षा से अधिक समय लग गया। इसके चलते स्कूल आवंटन को आगे बढ़ाना पड़ा। अब नए साल की शुरुआत के साथ इस प्रक्रिया को दोबारा गति दी गई है।
आवेदनों और आवंटन का पूरा आंकड़ा
ई-शिक्षकोष पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अंतर जिला स्थानांतरण के लिए कुल 41,689 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27,171 शिक्षकों को जिला आवंटित किया गया। इसके बाद 22,928 शिक्षकों को स्विच या विकल्प प्रणाली के तहत प्रखंड चुनने का अवसर दिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि लगभग सभी संबंधित शिक्षकों का प्रखंड आवंटन पूरा कर लिया गया है और अब इन्हीं शिक्षकों को उनके प्रखंड के अंतर्गत स्कूल आवंटित किए जा रहे हैं।
किन आधारों पर हो रहा है स्कूल आवंटन
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूल आवंटन पूरी तरह जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहां पहले पोस्टिंग दी जा रही है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही विषयवार आवश्यकता को भी ध्यान में रखा जा रहा है, जिससे गणित, विज्ञान, हिंदी या अन्य विषयों में किसी प्रकार की असंतुलन की स्थिति न बने। विभाग का उद्देश्य है कि शिक्षक उसी विषय के अनुरूप स्कूल में योगदान दें, जिसमें वे दक्ष हों।
जिलों को दिए गए सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि 10 जनवरी तक स्कूल आवंटन की प्रक्रिया हर हाल में पूरी की जाए। यदि किसी जिले में अनावश्यक देरी होती है या लापरवाही सामने आती है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की मानी जाएगी। विभाग स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है और जिलों से रोजाना प्रगति रिपोर्ट भी मांगी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की रुकावट को समय रहते दूर किया जा सके।
शिक्षकों की प्रतिक्रिया और उम्मीदें
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई शिक्षक स्कूल आवंटन शुरू होने से राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से वे अनिश्चितता की स्थिति में थे। वहीं कुछ शिक्षक अभी भी अपने पसंदीदा स्थान या स्कूल को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि आवंटन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी शिक्षक को यह न लगे कि उसके साथ अन्याय हुआ है।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाला असर
शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि 10 जनवरी तक स्कूल आवंटन पूरा हो जाने के बाद शिक्षक अपने नए विद्यालयों में योगदान दे सकेंगे। इससे राज्य के कई स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी दूर होगी और पढ़ाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विभाग का मानना है कि समय पर स्थानांतरण और पोस्टिंग से न केवल शिक्षकों को स्थिरता मिलेगी, बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी नियमित और बेहतर तरीके से चल सकेगी।

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